

राजेस तिवारी
पटना। बिहार के सीवान से राजद के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को पटना हाइकोर्ट ने तेजाब कांड के एकमात्र चश्मदीद गवाह राजीव रोशन की हत्या के मामले में जमानत मिल गई है वहीं दूसरे बाहुबली मोकामा से निर्दलीय विधायक अनंत सिंह पर कानून ने अपना शिकंजा कसते हुए एक साल और जेल की मियाद बढ गई है। उधर जमानत के बाद मो.शहाबुद्दीन ने गुरुवार की शाम भागलपुर जेल में बेल बांड भर दिया।
पटना जिला प्रशासन ने मोकामा के निर्दलीय विधायक अनंत सिंह पर क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) लगाया है।डीएम संजय कुमार अग्रवाल ने एसएसपी मनु महाराज की अनुशंसा पर सीसीए की मंजूरी देते हुए फाइल संपुष्टि के लिए गृह विभाग को भेज दी है। सीसीए की धारा 3 के तहत विधायक को अगले एक साल तक जमानत नहीं मिल सकेगी।
अनंत सिंह इन, शहाबुद्दीन होंगे आउट
राजद के पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन को चर्चित तेजाब कांड में हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। वहीं दूसरी तरफ मोकामा विधायक अनंत सिंह पर क्राइम कंट्रोल एक्ट (सीसीए) के तहत पटना डीएम ने कार्रवाई की है। यानी, पूर्व सांसद के जेल से निकलने का रास्ता साफ हो गया है, वहीं विधायक का अगले एक साल तक जेल में रहना तय हो गया।
शहाबुद्दीन को 11 साल बाद मिली जमानत, होंगे जेल से बाहर
16 अगस्त, 2004 को सीवान में दो सगे भाइयों गिरीश और सतीश राज को अगवा करने के बाद उनकी तेजाब से जला कर हत्या कर दी गयी थी। अब तक उनके शव नहीं मिले हैं। इस मामले में भी आरोप शहाबुद्दीन पर लगा था। इस केस के एकमात्र चश्मदीद गवाह तीसरा भाई राजीव रोशन था।
16 जून, 2014 को सिवान टाउन थाने में पूर्व सांसद के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। न्यायमूर्ति जितेंद्र मोहन शर्मा की अदालत में बुधवार को बचाव पक्ष के वकील यदुवंश गिरी ने कहा कि मामले में शहाबुद्दीन पर हत्या का सीधा आरोप नहीं है। जिस समय राजीव रोशन की हत्या हुई, पूर्व सांसद जेल में थे। उन पर हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप है।
सिवान के टाउन थाना कांड के केस संख्या 220-2014 के मुताबिक 17 जून, 2014 को तीसरे भाई राजीव रोशन की भी गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। इसके बाद सीवान टाउन थाने में उसके पिता ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी। प्राथमिकी में शहाबुद्दीन को हत्या की साजिश रचने का आरोपित बनाया गया था।
अपर लोक अभियोजक राजेंद्र नाथ झा ने जमानत याचिका का जमकर विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत दे दी। उनका तर्क था कि शहाबुद्दीन जेल में बंद हैं और वह गवाह को भी प्रभावित नहीं कर सकते। ऐसे में उन्हें जमानत दी जा सकती है। इस पर कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
सीसीए लगने के बाद अनंत एक साल और रहेंगे जेल में
वहीं छोटे सरकार के नाम से मशहूर बाहुबली अनंत सिंह जो अपने दबंग अ्ंदाज को लेकर चर्चा में रहते हैं उनके अभी जेल में ही रहने की संभावना है। अब सीसीए लगने के बाद एक साल तो उनके जेल से बाहर आने की कोई बात ही नहीं होगी। विधानसभा के मॉनसूत्र में शाही ठाठ-बाट से हिस्सा लेने पहुंचते थे विधायक अनंत सिंह जिन्हें देखकर लोग उनकी छवि को भूल नहीं पाते हैं।
वहीं छोटे सरकार के नाम से मशहूर बाहुबली अनंत सिंह जो अपने दबंग अ्ंदाज को लेकर चर्चा में रहते हैं उनके अभी जेल में ही रहने की संभावना है। अब सीसीए लगने के बाद एक साल तो उनके जेल से बाहर आने की कोई बात ही नहीं होगी। विधानसभा के मॉनसूत्र में शाही ठाठ-बाट से हिस्सा लेने पहुंचते थे विधायक अनंत सिंह जिन्हें देखकर लोग उनकी छवि को भूल नहीं पाते हैं।
कौन हैं अनंत सिंह, क्यों चर्चा में रहता है ये बाहुबली,
2005 पहली बार मोकामा से चुनाव जीतने वाले अनंत सिंह को अपने इलाके में छोटे सरकार के नाम से भी जाना जाता है। मोकामा के इस डॉन की सरकार अलग ही चलती है। उसकी धमक इस पूरे इलाके में चलती है और कोई उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता। अनंत सिंह पर बिहार में करीब 35 आपराधिक मामले दर्ज हैं
2007 में अनंत का नाम एक महिला से बलात्कार और हत्या के मामले में सामने आया। जब एक पत्रकार ने उनसे इस संबंध में सवाल पूछा तो उसकी बेरहमी से पिटाई कर डाली। मामले ने तूल पकड़ा तो अनंत की गिरफ्तारी भी हुई और वह कुछ दिन जेल में भी रहे।
मांझी को दी थी धमकी
हमेशा बॉडीगार्ड से घिरे रहने वाले अनंत सिंह के आतंक का इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को भी धमकी दी थी। इससे पहले अनंत नीतीश सरकार में मंत्री रहीं परवीन अमानुल्लाह को भी खुल्लेआम धमकी दे चुका था।
हमेशा बॉडीगार्ड से घिरे रहने वाले अनंत सिंह के आतंक का इससे भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को भी धमकी दी थी। इससे पहले अनंत नीतीश सरकार में मंत्री रहीं परवीन अमानुल्लाह को भी खुल्लेआम धमकी दे चुका था।
बताते हैं कि अनंत पहली बार उस वक्त जेल गया था जब वह महज 9 साल का था। उसके बाद अपराध की दुनिया में उसने जो जलवा कायम किया, वो अभी तक कायम है। आलम यह है कि लोग उसका नाम लेने से भी डरते हैं। लोगों का यहां तक कहना है कि जिसने भी अनंत सिंह के खिलाफ जाने की कोशिश की उसकी हत्या कर दी गई।
पुलिस से पहले अनंत की अदालत

अनंत सिंह का अपने इलाके में इतना खौफ है कि जब भी शहर में कोई घटना होती है तो लोग पुलिस से पहले उसके पास जाते हैं। 1990 के दशक में इसके पास के ही गांव के बदमाश ने बाढ़ बाजार से व्यापारी का अपहरण कर लिया था। पुलिस कुछ नहीं कर पाई और मामला अनंत सिंह के पास गया|
अनंत ने अपने गुर्गो के साथ अपहर्ता के घर धावा बोल दिया। दोनों ओर से जबर्दस्त गोलीबारी हुई जिसमें कई लोग मारे गए। हालांकि बाद में इस घटना को जातिवाद का रंग दे दिया गया, क्योंकि कई बड़े नेता भी इस लड़ाई में कूद गए थे। खास बात यह है कि अनंत जब धावा बोलने आया तो घोड़े पर सबसे आगे वही था और सिर पर सोने का मुकुट पहना हुआ था।
बग्घी की सवारी के शौकीन
2013 में अनंत फिर चर्चा में आए जब वह अपनी शानदार मर्सडीज छोड़कर बग्घी पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे। पटना की सड़क पर खुद बग्घी चलाकर निकला और देखने वाले देखते रह गए। पूछे जाने पर अनंत ने कहा, मैंने दिल्ली से बग्घी बनवाई और यहां लेकर आया। मैं तब से इसकी सवारी का मजा ले रहा हूं और इसमें ईंधन भी नहीं लगता।
2013 में अनंत फिर चर्चा में आए जब वह अपनी शानदार मर्सडीज छोड़कर बग्घी पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे। पटना की सड़क पर खुद बग्घी चलाकर निकला और देखने वाले देखते रह गए। पूछे जाने पर अनंत ने कहा, मैंने दिल्ली से बग्घी बनवाई और यहां लेकर आया। मैं तब से इसकी सवारी का मजा ले रहा हूं और इसमें ईंधन भी नहीं लगता।
खास बात ये है कि इस बग्घी में लाइट और म्यूजिक सिस्टम भी लगा हुआ है। सवारी के दौरान बैकग्राउंड में एक गाना भी चल रहा था, हम हैं मगहिया डॉन, लोग कहें छोटे सरकार। ये गाना एक भोजपुरी फिल्म के लिए तैयार किया गया था जिसमें खुद अनंत सिंह अभिनय करने वाले थे।
अनंत की धमक के आगे सब फीके
कुछ साल पहले अनंत सिंह का एक वीडियो आया था जिसमें वह एके 47 राइफल लेकर नाचते दिख रहे थे। टीवी चैनलों पर आईं ये तस्वीरें बयां कर रही थी कि इस बाहुबली की अपने इलाके में कैसी धमक है। इसने बताया कि अनंत को नीतिश कुमार सरकार में छोटा सरकार यूं ही नहीं कहा जाता है।

