गोपालगंज: राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान का छठा राष्ट्रीय अधिवेशन और अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव गोपालगंज के वी.एम. फील्ड में भव्य और सफलतापूर्वक आयोजित हुआ। तीन दिनों तक चले इस महाआयोजन ने भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति लोगों के जुड़ाव और समर्पण को एक नई पहचान दी। देश-विदेश से आए भोजपुरिया समाज के लोगों ने इसे एक ऐतिहासिक और गौरवशाली अनुभव बताया।
भोजपुरी भाषा के सम्मान का बड़ा मंच
यह अधिवेशन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भोजपुरी भाषा के मान-सम्मान और उसके भविष्य को सशक्त बनाने का मजबूत मंच साबित हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, कला और विचारों का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने यह संकेत दिया कि भोजपुरी अब वैश्विक पहचान की ओर तेजी से बढ़ रही है।
साहित्यिक संगम और वैचारिक मंथन
कार्यक्रम के दौरान कवि सम्मेलन, शोध पत्र वाचन और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भोजपुरी साहित्य की गहराई, आधुनिक स्वरूप और संवैधानिक मान्यता पर गंभीर चर्चा हुई। विद्वानों ने भोजपुरी को रोजगारपरक भाषा बनाने पर भी अपने विचार रखे।
लोक संस्कृति की जीवंत झलक
अधिवेशन का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा भव्य सांस्कृतिक जुलूस। इसमें बैलगाड़ी, घोड़ा, ट्रैक्टर, हल, जुवाठ, लालटेन और पारंपरिक वस्त्रों के साथ लोक जीवन की झलक प्रस्तुत की गई। लोग पियरी धोती, कुर्ता और गमछा पहनकर शहर भ्रमण में शामिल हुए और “जय भोजपुरी” के नारों से माहौल गूंज उठा।
लोक व्यंजन से सामाजिक समरसता का संदेश
कार्यक्रम में दही-चूड़ा और लिट्टी-चोखा जैसे पारंपरिक भोज का आयोजन किया गया, जिसने लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ सामाजिक एकता का संदेश दिया।
अश्लीलता के खिलाफ और संवैधानिक मान्यता का संकल्प
अधिवेशन में भोजपुरी गीत-संगीत से अश्लीलता दूर करने और भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का संकल्प लिया गया।
नई कमिटी का गठन, जमशेदपुर को बड़ी जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय भोजपुरी संस्थान की नई कमिटी की घोषणा की गई। इसमें जमशेदपुर के प्रदीप सिंह भोजपुरिया को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।
अन्य प्रमुख पदों में डॉ. हरेंद्र सिंह (मुख्य संरक्षक), डॉ. उमाशंकर साहू (संयोजक), अशोक कुमार सिंह (अध्यक्ष), बृजमोहन अनाड़ी (महासचिव) और जय हिंद साह (संगठन सचिव) शामिल हैं।
देशभर के कलाकारों ने बांधा समां
इस महोत्सव में दिल्ली, कोलकाता, बोकारो समेत विभिन्न शहरों से आए कलाकारों ने लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अगला महोत्सव कोलकाता में
आयोजकों ने घोषणा की कि अगला अंतर्राष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव इसी वर्ष कोलकाता में आयोजित किया जाएगा, जिससे भोजपुरी संस्कृति को और व्यापक मंच मिलेगा।




