
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित बेल्डीह चर्च स्कूल लगातार इस तरह की हरकत कर रहा है जो स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों और उनके परिजनों को नागवार गुजर रहा है। एक तो स्कूल में दूसरे छात्रों द्वारा एक छात्र रिशांत ओझा की बुरी तरह पिटायी कर दी गई औऱ मामले में कार्रवाई करने की बजाय स्कूल प्रबंधन मामले की लीपापोती करने के साथ ही पीड़ित छात्र औऱ परिवार को ही प्रताड़ित करने में लगा है। अब स्कूल प्रबंधन ने अखबारों में बच्चे की फीस माफी से संबंधित प्रेस बयान जारी कर उसका औऱ उसके परिजनों को हास्य का पात्र बना दिया है, जबकि परिजनों द्वारा स्कूल से कभी भी फीस माफ करने को नहीं कहा गया। अगर ऐसा है भी तो कई स्कूल में कई बच्चों की फीस माफ होती है, लेकिन यह स्कूल का अंदरुनी मामला होता है औऱ इससे दूसरे लोगों को कोई लेना देना नहीं होता। ऐसे में बेल्डीह चर्च स्कूल द्वारा फीस माफी के संबंध में प्रेस को बयान जारी कर क्या साबित करने का प्रयास किया जा रहा है, यह समझ से परे हैं। हालांकि एक बात तो साफ है कि स्कूल अपने तरीके से बच्चे औऱ उसके परिवार को प्रताड़ित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता। अब पीड़ित बच्चे के परिजनों ने पूरे मामले में डीसी के साथ ही डीएसई और डीईओ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की ही।
बागबेड़ा निवासी रमेश ओझा ने डीसी से की गई शिकायत में कहा है कि उनका पुत्र रिशांत ओझा बिष्टुपुर स्थित बेल्डीह चर्च स्कूल की सातवीं कक्षा का छात्र है। बीते 4 फ़रवरी 2020 से लेकर आजतक बेल्डीह चर्च स्कूल प्रबंधन एवं प्रिंसिपल की संलिप्तता और सुनियोजित षड्यंत्रों से लगातार तीसरी बार बाल-अधिकार क़ानूनों और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के नियमों की अवमानना करते हुए उसे प्रताड़ित किया गया है। उन्होंने कहा कि 12 मार्च 2020 को बेल्डीह चर्च स्कूल की प्रिंसिपल एल. पीटरसन द्वारा प्रेस बयान जारी कर कहा गया कि रिशांत ओझा के परिजन 9 मार्च 2020 को फाइनल रिजल्ट लेने के लिए स्कूल नहीं आए, जबकि क्लास टीचर ने दोपहर 12:30 तक का इंतज़ार किया था। इतना ही नहीं स्कूल ने उनके पुत्र रिशांत ओझा के सितंबर 2019 से लेकर मार्च 2020 तक के स्कूल फ़ीस को माफ़ किये जाने के निर्णय का ज़िक्र लिखित रूप से प्रेस वक्तव्य में किया है। जबकि सच्चाई यह है कि छात्र के परिवार से किसी सदस्य द्वारा कभी भी स्कूल प्रबंधन से फ़ीस माफ़ी हेतु कोई आग्रह नहीं किया गया। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन एवं प्रिंसिपल ने यदि ऐसा कोई निर्णय लिया था तो इसकी अभिभावकों को देनी चाहिए थी एवं उनके सहमति के बाद ही प्रेस में बयान जारी करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि बिना उनकी जानकारी और सहमति के ऐसे प्रेस रिलीज़ जारी होने और उसके बाद उक्त आशय के भ्रामक समाचार प्रकाशित होने से उनके साथ ही परिवार की सार्वजनिक मानहानि हुई है और प्रतिष्ठा को आघात पहुंचा है। उन्होंने इसे निज़ता के उल्लंघन का भी मामला बताते हुए कहा कि बच्चे के फ़ीस से जुड़ी निज़ी जानकारी को अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक करवाना राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देशों की सरेआम अवमानना है।
उन्होंने कहा कि जहां तक स्कूल का यह कहना कि रिशांत की मां रिजल्ट लेने स्कूल नहीं गई थई, इस बात की जानकारी स्कूल परिसर में अधिष्ठापित सीसीटीवी कैमरों की जांच से हो जाएगी। इसके बावजूद बेल्डीह चर्च स्कूल की प्रिंसिपल एल. पीटरसन के द्वारा अखबारों के माध्यम से झूठे, भ्रामक और गलत तथ्य वाले ख़बर प्रकाशित करवाकर मेरे पूरे परिवार की सार्वजनिक मानहानि की गई है। उन्होंने कहा कि अब उनका बेटा काफ़ी डिप्रेशन में है। उसका कहना है कि स्कूल जाने के बाद उसे बच्चें फ़ीस माफ़ी के विषय में चिढ़ायेंगे जिससे फिर प्रताड़ना झेलनी पड़ेगी। इन बातों से उपायुक्त को अवगत कराते हुए उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अभिभावकों ने इसकी लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधीक्षक और जिला शिक्षा पदाधिकारी से भी किया है।

