एक बार फिर दुमका होगा चर्चा में ,शिबु ,बाबुलाल आमने सामने ,बीजेपी से सुनील ने ठोकी ताल

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अजीत कुमार ,दुमका ,15 मार्च
दुमका संसदीय क्षेत्र की सियाशी विसात बिछ चुकी है. जेएम्एम् से सुप्रीमो
शिबू सोरेन, जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी और नमो की लहर पर सवार भाजपा
से सुनील सोरेन. मुकाबला दिलचस्प हो गया है. शिबू सोरेन ने ७ बार यहाँ के
प्रत्निधित्व किया है, और वर्तमान सांसद है. वही बाबूलाल मरांडी दो बार
प्रतिनिधित्व कर चुके है. इस बार बाबूलाल अपना गृह क्षेत्र छोड़कर दुमका
से चुनाव लड़ रहे है. भाजपा से लुईस मरांडी के नाम की चर्चा जोरो पर
थी,लेकिन आखिरी समय में टिकट सुनील सोरेन को मिला. ऐसे में भाजपा का एक
कुनवा में नाराजगी भी है.
दुमका लोकसभा में जामताड़ा, नाला, सारठ, दुमका, जामा और शिकारीपाड़ा
विधानसभा क्षेत्र पड़ता है. जिसमे ५ विधानसभा वर्तमान में झामुमो के पास
है जबकि एक विधानसभा भाजपा के पाले में है. अगर क्षेत्र के विकास की बात
करे तो कोई बड़ी परियोजना अब तक जमीं पर नहीं उतर सका है. सांसद द्वारा कई
महती परियोजना का आश्वाशन दिया गया था. लेकिन हकीकत क्षेत्र की दुर्दश
बयां कर रही है. किसानो को सिचाई सुविधा का इंतजार है, बेरोजगारों को
रोजगार का, पलायन रोकने की दिशा में कुछ नहीं हो सका है.निर्बाध बिजली
हेतु बड़े पॉवर प्रोजेक्ट की घोषणा अब तक अधूरी है. विकाश के नाम पर अब तक
क्षेत्र में सांसद निधि का उपयोग पुलिया, कलवर्ट, पीसीसी, सामुदायिक भवन,
शैक्षणिक संस्थानों में अतिरिक्त कक्ष आदि के निर्माण पर हुआ है.
भय, भूख, भ्रष्टाचार, विशेष राज्य का दर्जा, अपराध मुक्त झारखण्ड इस बार
का चुनावी मुद्दा बन रहा है. हालांकि अभी अधिसूचना जारी नहीं हुई है.
मुद्दे और भी बन सकते है. वैसे मतदाताओ की बाहुल्यता पर नजर डाले तो
आदिवासी, अल्पसंख्यक, पिछड़ी जाती और सामान्य वर्ग के वोटर है. सभी
राजनितिक दलों की नजर आदिवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं पर टिकी हुई है.
लम्बे अंतराल के बाद बाबूलाल मरांडी अपना गृह क्षेत्र छोड़कर दुमका में
धमके है. वही नमो की लहर पर सुनील सोरेन को भरोसा है. शिबू सोरेन का
दुमका गढ़ माना जा रहा है. और आदिवासी मतदाता पर उनकी विशेष पकड़ मानी जाती
है. वही बाबूलाल मरांडी ने जनसंघ के कार्यकर्ता के रूप में संथाल परगना
में काफी काम किया था. जिसका फायदा उन्हें दो बार दुमका के प्रतिनिधित्व
करने के रूप में मिला. जबकि इस बार भाजपा का कैंडिडेट बदल चूका है और
मरांडी झाविमो के उम्मीदवार के रूप में मैदान में खड़े है. मुकाबला पूरी
तरह से त्रिकोनिये बन गया है.बहरहाल अभी कहना मुश्किल है की ऊँट किस करवट
बैठेगा.

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