आदित्यपुर: आदित्यपुर अधिवक्ता संघ द्वारा सोमवार 2 मार्च 2026 को अधिवक्ता चौक के समीप रोड नंबर–32, आदित्यपुर-2 स्थित संघ कार्यालय में भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए और पूरे उत्साह के साथ रंग-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। आयोजन का माहौल पूरी तरह से उल्लास, भाईचारे और सामाजिक एकजुटता से सराबोर रहा।
रंगों के साथ आपसी सौहार्द
समारोह की शुरुआत पारंपरिक तरीके से हुई। उपस्थित अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी। इस दौरान मिठाइयों का वितरण किया गया और सभी ने मिलकर पर्व की खुशियां साझा कीं। अधिवक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन आपसी संबंधों को मजबूत करने और तनावमुक्त वातावरण बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
भोजपुरी रामायण मंडली की प्रस्तुति
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भोजपुरी रामायण मंडली की सांस्कृतिक प्रस्तुति रही। अधिवक्ता एल. बी. ठाकुर, मथुरा यादव, बजरंग पांडे, जितेंद्र जी सहित अन्य कलाकारों ने ढोल-झाल की मधुर संगत में भगवान शंकर, राम और कृष्ण से जुड़े होली गीत प्रस्तुत किए। भक्ति और लोकसंस्कृति से ओतप्रोत गीतों ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी
समारोह में संघ के मुख्य संरक्षक ओम प्रकाश, संरक्षक सुनील कुमार स्वाईं, संरक्षिका रंजनी मिश्रा, संरक्षक राजेश ठाकुर, अध्यक्ष दीपेंद्र नाथ ओझा, महासचिव रवि शंकर पासवान, उपाध्यक्ष मनोज कुमार दुबे, निशांत कुमार एवं मनोज कुमार साहू सहित कई वरीय अधिवक्ता उपस्थित रहे। इसके अलावा लाला अजीत अंबाष्ट, जितेंद्र कुमार सिंह, रामानुज सिंह, आशुतोष कुमार, ऋषि कुमार, बृजेश वर्मा, संजीव कुमार झा, अजय कुमार सिंह, महेश ठाकुर समेत दर्जनों अधिवक्ताओं की सहभागिता रही।
सड़क सुरक्षा पर विशेष अपील
होली के उत्सव के बीच समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए संघ ने सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता संदेश भी दिया। मुख्य संरक्षक ओम प्रकाश ने कहा कि झारखंड सहित जिले में सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी चिंताजनक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि दोपहिया वाहन चलाते समय अनिवार्य रूप से हेलमेट पहनें, वाहन नियंत्रित गति से चलाएं और किसी भी स्थिति में नशे की हालत में वाहन न चलाएं।
सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
समारोह केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक चेतना का भी प्रतीक बना। अधिवक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पर्व की खुशियां तभी सार्थक हैं जब समाज सुरक्षित और जागरूक हो।



