
आदित्यपुर: रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। इस पवित्र रिश्ते की कोई उम्र नहीं होती, और इसकी एक जिंदा मिसाल आदित्यपुर में देखने को मिली। यहाँ 82 वर्षीय शीला झा ने अपने 68 वर्षीय छोटे भाई लेखानंद झा की कलाई पर जीवन में पहली बार राखी बांधी। भाई-बहन के इस भावुक मिलन का नजारा वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया।


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तबीयत बिगड़ने पर दरभंगा से पहुंचे भाई
मिली जानकारी के अनुसार, आदित्यपुर निवासी 82 वर्षीय शीला झा इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही हैं। बहन की खराब तबीयत की खबर मिलते ही उनके इकलौते भाई लेखानंद झा बिहार के दरभंगा से दौड़ते हुए आदित्यपुर पहुंचे। इसी दौरान रक्षाबंधन का पावन पर्व भी था। इतने सालों बाद भाई को अपने सामने पाकर बहन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने जीवन में पहली बार अपने भाई की कलाई पर राखी सजाई।
परिस्थितियों के कारण पहली बार आया यह अवसर
बताया गया कि शीला झा चार बहनों में हैं और लेखानंद झा उनके इकलौते भाई हैं। उम्र के फासले और अलग-अलग परिस्थितियों के कारण दोनों भाई-बहन के बीच कभी रक्षाबंधन का यह अवसर आ ही नहीं पाया था। जीवन के इस पड़ाव पर पहली बार भाई को राखी बांधना दोनों के लिए बेहद अलौकिक और भावुक क्षण था। राखी बांधते समय बहन के चेहरे पर जहां असीम संतोष और खुशी थी, वहीं भाई की आंखों में अपनी बीमार बहन के प्रति अथाह स्नेह साफ झलक रहा था।
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500 रुपये के शगुन ने बढ़ाई खुशी
राखी बंधवाने के बाद भाई लेखानंद झा ने अपनी बहन को 500 रुपये बतौर उपहार दिए। भाई के हाथों मिला यह शगुन और छोटा-सा उपहार बहन के लिए अनमोल बन गया। हालांकि, इस मुलाकात में पैसों या उपहार से कहीं अधिक मायने उस स्नेह और अपनापन ने रखे, जो उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों के दिलों में जीवंत है।
यह मार्मिक घटना यह संदेश देती है कि भाई-बहन का रिश्ता समय और दूरी की सीमाओं से परे होता है। शीला झा और लेखानंद झा की यह कहानी आज के दौर में रिश्तों की उस खूबसूरती को दर्शाती है, जिसे शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं है।


