
सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) ब्रजेश भारती ।
सोमवार को सिमरी बख्तियारपुर-सहरसा सड़क मार्ग पर एक सड़क हादसे का शिकार हुआ इंटरमिडिएट का छात्र राजेश कुमार के संबंध में कहां जाता है की “हौनहार बिरवान के हौत चिकने पात” सटिक बैठती थी। पर एक हादसे नही उस बिकलांग सब्जी बिक्रेता पिता के मंसुबे पर पानी फेर दिया। हादसे के बाद परिवार में कौहराम मच गया है जैसे ही मौत की खबर परिजनों को लगी पिता राजकिशोर पौद्दार,मां मंजू देवी छोटे भाई दीपक कुमार का रौ-रौ कर बुरा हाल हो गया,बख्तियारपुर थाना में पिता गमहीन आंसू व रह रह कर बैहोश हो जाना हर किसी के आंखों को नम करने के लिये काफी था। मां मंजू देवी क्रंदन आसपास के माहौल को दिल दहला रहा था मां विलाप करती कह रही थी की नैय जानै रहीये् की भौर के निकलल बेटा केय ई हाल कनी देर में हो जैतेय् अब कैय हौते पालनहार हो भगवान। मृतक छात्र के साथी व आसपास के लोगो का कहना था की बचपन से ही राजेश बड़ा हौनहार था पढ़ाई के साथ-साथ सब्जी बेचने में भी अपने पिता का साथ देने में वह नही चुकता था पिता जब ठेला में सब्जी लेकर निकलता तो घुम-घुम कर मुख्य बाजार होते हुये ब्लाक चौक से लेकर डाकबंगला चौक होते हुये पुरानी बाजार तक चला जाता था ,पैर से बिकलांग होने के बाबजूद सभी अपने बेटे के शिक्षा देने में कभी कोई कमी नही होने दी। दो माह से नोटबंदी की मार भी उसने अपने हौनहार बेटे पर नही ट्रेन रद्द हो जाने के बाबजूद उसने टेम्पू से बेटे को कोचिंग की पढ़ाई के लिये सहरसा भेजता रहा।वह छात्र सहरसा में दो कोचिंग करता था पहला कैमेस्ट्री की पढ़ाई के बाद फिजिक्स की पढ़ाई करता था। छोटे भाई दीपक कुमार कहता है बड़े भाई हर वक्क बोलते थे कुछ नही है जितना पढ़ोगे उतना बड़ा आदमी बनोगें।हमेशा पढ़ाई की ही बात करते थे।कुल मिला कर कह सकते है की एक हौनहार चिराग घर को रौशन करने से पहले ही ट्रक रुपी आंधी का शिकार असमय हो गया


