
सरायकेला-खरसवाॅ।
राष्ट्रपिता महत्मा गांधी अति पिछड़ा जन समुदाय कोेे ईश्वरीय शब्द हरि का व्यक्ति सेे परिभाषित किया था । वही केन्द्र सरकार आदिम जाति की संज्ञा दी और उस समुदाय के लिए सरकार द्वारा कई कल्याणकारी योजना की घोषणा की जिसका लाभ आज तक अंतिम व्यक्ति कोेे नही मिल सका। सरकार की योजना सफेद हाथी सावित हो रहा है । इसका उदाहरण जिला सरायकेला- खरसवाॅ के चाण्डिल प्रखण्ड के भुईयाॅडीह निवासी गोपाल लायक उम्र लगभग 60 वर्ष जो बचपन से नेत्रहीन है जिससे सरकारी योजना समाजिक सुरक्षा पेंशन योजना मिल रहा था। दिसम्बर 2014 से बंद है जो सरकारी मकड़ा जाल में उलझकर दानेदाने को मोहताज है । गोपाल लायक (नेत्रहीन) बताया की तीन साल से पेशन नही मिल रहा है । बैक का चक्कर काटते थक गया । बीबी की मौत के वाद मेरा देख भाल संगे संबंधी कर रहे है ।
गोपाल लायक के पत्नी का मृत्यु 6 माह पूर्व हुई । जो खेतो मे मेहनत मजदूरी कर देख रेख करती थी । पत्नी के मृत्यु के वाद 7 वर्षीय पुत्र को ससुराल वाले ले गये अकेले जीवन यापन कर रहा है । पेेंशन मिल रहा था वह भी दिसम्बर 2014 में बंद हो गया। पेंशन एक मात्र जीने का आधार था । मुखिया रोजगार सेवक बैक मित्र, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, अनुमण्डल पदाधिकारी एवं जिला समाज सुरक्षा विभाग को भी पता नही की किस कारण पेशन बंद हुयी । बैंक लिंक का हवाला देकर सभी पदाधिकारी अपना हाथ झाड़ते हुये दिखे । जबकी बैंक आधार लिंक का मामला पीछले 1 वर्ष का है । गोपाल लायक पीछले 3 वर्षो से पेशन नही मिल रहा है । पुनः गोपाल लायक के पेशन की जानकारी मागी गई तो अंचल द्वारा जांच किया तो पेंशन पोटल सेेेेे नाम कटा हुआ पाया गया ।
पत्रकारों ने गोपाल लायक के समस्या लेकर अनुमण्डल पदाधिकारी के समक्ष पहुंचे तो रात को 8 बजे टीम गठित किया गया । जिसमें सुनिल कुमार अंचल अधिकारी चाण्डिल, भगीरथ प्रसाद अनुमण्डल पदाधिकारी , एमओ चाण्डिल गोपाल लायक के घर पहुंच कर पेंशन की प्रक्रिया के लिए नये आवेदन पर अंगुठा लिया गया । परन्तु बंद क्यो हुआ इस पर किसी प्रकार की कर्रवाही की वात नही की गई । इसके जिम्मेवार मुखिया, रोजगार सेवक, बैंक मित्र आदि पर किसी भी प्रकार की कार्रवाही की बात नही कि गई आखरी में पुनः गोपाल लायक सरकारी मकड़ा जाल में उलझा दिया दे रहा है ।
किहीं न कहीं सरकार की घोषणा को घरातल पर काम करने वाले लोग सरकार को ही ठंगने में लगे है । जिसका प्रमाण गोपाल लायक जिसको आज पत्रकारो के दिखाने पर कुछ भला हुआ पर सवाल यह है कि आज भी एसे कई नेत्रहीन, असाहय, विधवा, वृद्धा को सरकारी सुविधा से बंचित है, मुहैया कैसे होगी । जनप्रतिनिध और पदाधिकारी चेन की निदं सो रहे है । क्या बार बार जगाना पड़ेगा झारखण्ड में यह सवाल बना हुआ है ।



