
राँची ।
मुख्यंन्त्री के विदेश दौरे पर सूबे की प्रमुख विपक्षी पार्टी झामुमो पर सवाल खड़े किये हैं, जिस पर सतारूढ़ भाजपा ने झामुमो पर पलटवार किया है। झामुमो पर हमला बोलते हुए भाजपा के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश ने कहा है कि झारखंड में हो रहे विकास और गांव, गरीब, किसान के हित में रघुवर सरकार द्वारा उठाये गये कदम से झामुमो बौखला गया है। बौखलाहट का यह आलम है कि हेमंत सोरेन अनाप शनाप और तथ्यहीन आरोप रहे हैं। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे पर सवाल उठानेवाले हेमंत सोरेन को आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जानकारी ले लेनी चाहिए। कांग्रेस हो या झामुमो ये लोग जब सत्ता में रहे तो इनकी इतनी भर सोच थी कि रॉयल्टी से राज्य का विकास संभव है। इस सरकार की सोच है कि वैल्यू एडेड प्लांट लगाने से ही राज्य से गरीबी और बेरोजगारी दूर हो सकती है।


सरकार ने वैल्यू एडेड प्लांट लगाने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया है। क्योंकि जब तक यह नहीं होगा राज्य से गरीबी और बेरोजगारी दूर नहीं होगी। हेमंत सोरेन के मुंह से गरीबी और संघर्ष की बात अच्छी नहीं लगती है। जो व्यक्ति सोने की चम्मच के साथ पैदा हुआ हो वो अब गरीबी और संघर्ष की बात करे, अच्छा नहीं लगता है। हेमंत सोरेन बताये कि उन्होंने अपने जीवन में कब गरीबी देखी है और कब संघर्ष किया है। शिबू सोरेन यह बात करते तो यह शोभा देता। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को मौज मस्ती करार देनेवाले ये वहीं हेमंत सोरेन हैं, जो मात्र 14 माह के अपने मुख्यमंत्रीत्व काल में 10 दिन छुट्टी मानने गोवा गये थे। जबकि मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने अब तक के अपने कार्यकाल में एक दिन भी छुट्टी नहीं ली है। शराब के बारे में सोरेन न बोले तो ही अच्छा है।
हेमंत सोरेन वंशवाद और परिवारवाद की राजनीति की उपज हैं। यही वजह है कि झामुमो में प्रतिभाशाली होने के बावजूद नेताओं को मौका नहीं मिलता है। आगे भी नहीं मिलेगा। हेमंत सोरेन का यह हाल है कि पार्टी तो दूर अपने घर में भी किसी को आगे नहीं बढ़ना देना चाहते हैं। क्या वजह है कि बाहर से आया उम्मीदवार झामुमो के टिकट पर जीत जाता है और जबकि हेमंत सोरेन के अपने सगे भाई बसंत सोरेन चुनाव हार जाते हैं। सबसे हास्यास्पद बात यह है कि हेमंत सोरेन अपने को आदिवासी समाज का हितैषी बताते है, वहीं दूसरी ओर लालू उरांव जैसे गरीब आदिवासी की बेशकीमती जमीन शराब पिला कर हड़प लेते हैं। भाजपा की यही सलाह है कि अगर झामुमो भलाई चाहता है, तो उसके नेता चुप रहें। नहीं तो भाजपा उनकी पोल खोलने में देर नहीं करेगी। आदिवासियों की जमीन बड़े पैमाने पर खरीद के मामले में सोरेन परिवार को भाजपा पिछली बार पूरी तरह से एक्सपोज कर चुकी है। भाजपा का मानना है कि हेमंत सोरेन अभी राजनीति में पूरी तरह से परिपक्व नहीं हुए हैं। ऐसी बचकाना बात करने वाला नेता प्रतिपक्ष झारखंड में आज तक नहीं हुआ है।
ये वहीं झामुमो है, ये वहीं सोरेन परिवार है, जिसने झारखंड की अस्मिता को महज कुछ करोड़ रुपये में दिल्ली में बेचने का काम किया था। राज्य में जब झामुमो की सरकार आयी, तो उसने बालू घाट मुंबई की कंपनी को बेच दिया था, जबकि भाजपा सरकार ने बालू घाट पंचायतों को दे दिया।भाजपा झामुमो से पूछना चाहती है कि आखिर धर्मांतरण का विरोध झामुमो क्यूं कर रहा है। इस विरोध से ही स्पष्ट हो गया कि झामुमो आदिवासियों का कितना हितैषी हैं। आदिवासी समाज जग गया है। झामुमो-कांग्रेस जैसे दलों को चाल चरित्र झारखंड की जनता देख चुकी है। सिमडेगा मामले में दो-दो जांच करायी गयी है। दोनों में मलेरिया से मौत होने की पुष्टि हुई है।

