
अय्याशी की बलिवेदी पर फिर भेंट चढ़ी ममता


दीपक झा
बोकारो।
बोकारो में मन की ममता और मानवता एक बार फिर से शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आयी है। बुधवार को यहां के चास थाना क्षेत्र स्थित महावीर चौक से आगे चन्द्रा सिनेमा के निकट एक लावारिस नवजात बच्ची कूड़े के ढ़ेर में लिपटी बरामद की गयी। पेपर और बोरे में लिपटी यह बच्ची मात्र एक घण्टे की थी। आसपास मौजूद लोगों ने जब बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो फौरन वहां पहुंच खोजबीन शुरू की। इसी क्रम में कचरों के ढ़ेर के बीच कागज और बोरे आए लिपटी हालत में उक्त नवजात बच्ची बरामद की गयी। लोगों ने मानवता का परिचय देते हुए अविलम्ब नजदीकी केएम मेमोरियल अस्पताल में बच्ची को भर्ती कराया। अस्पताल के महाप्रबंधक बीएन बनर्जी ने बताया कि बच्ची की हालत में सुधार हो रहा है। उसे सांस लेने में तकलीफ होने की समस्या है। डाक्टर इलाज में लगे हैं।
वहीं, बच्ची की बरामदगी की खबर मिलते ही बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम मौके पर पहुंच गयी। समिति के सदस्य डा. प्रभाकर कुमार और अन्य लोगों ने घटनास्थल के अलावा अस्पताल पहुंच मामले की पूरी जानकारी ली। डा. प्रभाकर ने बताया कि चास थाने के माध्यम से बाल कल्याण समिति, बोकारो को बच्ची सुपुर्द की जा रही है। बच्ची को बोकारो जेनरल अस्पताल (बीजीएच) के स्पेशल बेबी केयर यूनिट में रखा जायेगी, जहां उसके पूर्ण स्वस्थ हो जाने के बाद किसी भी स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी को बुलाकर देखभाल व लालन-पालन के लिए सौंप दिया जाएगा। तदुपरांत प्रावधानानुसार दत्तक-ग्रहण की प्रक्रिया होगी।
उल्लेखनीय है कि इन दिनों बोकारो में लावारिस बच्चों की बरामदगी में काफी इजाफा देखा जा रहा है। विगत एक वर्ष में यह आठवें लावारिस नवजात की बरामदगी हुई है। एक तरफ सरकार जहां ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे नारे के साथ बेटियों को बचाने की मुहिम चला रही है, वहीं मानवता और ममता को शर्मसार कर देने वाले लोग इस नारे को तिलांजलि देने में लगे हैं। जिस देश मे नारी को देवी का दर्जा है, वहीं एक बेटी का इस तरह कूड़ों के ढ़ेर में मिलना बरबस यही कहने को विवश करता है कि ‘हे बेटी तू इन दुनिया मे क्यों आयी? यहां ममता को मां गयी है भूल, बस अय्याशी रह गयी है जिसका मूल।’ यहां ममता तो अय्याशी की बलिवेदी पर तो चढ़ गयी, लेकिन बच्ची काल की भेंट चढ़ने से बच गयी। एक मानवता ने जहां बच्ची को मरने के कचरे में फेंक दिया, वहीं दूसरे ने मानवता की ही भेंट चढ़ा दी।

