
जमशेदपुर।


बार बार चम्पई सोरेन को लोकप्रिय कहे जाने पर हसि आती है ,जिस क्षेत्र के विधायक अपने ही गाँव का विकास नही कर सकता ओ लोकप्रिय कैसे हो सकता है ,इसके विपरीत बेतुके बयान देने से परहेज करें जेएमएम के नेतागण , बिहार और यूपी के मिट्टिमे इतनी खुसबू और सुगन्ध है कि किसी दूसरे के पर्व त्योहार पर सहयोगात्मक रुख अख्तियार करते है शहर में बिभिन्न संगठनों द्वारा गुरुगोबिंद जयंती हो या गुरु महाराज के प्रकाशोत्सव हो , मुस्लिम समाज का ईद हो , ईसाई धर्म के बड़ा दिन हो कभी भी विवादित कार्य नही करते मिशाल के तौर पर बिहार के गांधी मैदान जो सिख समुदाय के इतिहास में स्वर्णिम अक्षर से लिखा गया है जबकि छठ पर्व पर इससे पहले कभी छेड़खानी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कोई नही किया और ऐसे नेता लोकप्रिय हो रहे है जिनके अपने गाँव मे विकास नही है शर्म आती है उनलोगों पर भी जो ऐसे लोगो को सभी समुदाय के नेता करार देते है ।
प्रशासन को धन्यबाद देते है जो समय रहते स्थिति को भाप लिए वर्ना नागाडीह जैसे घटना की पुनरावृति दुहराने की पटकथा लिखी जा चुकी थी । आरोप लगाया गया कि छठ का रास्ता रोकने वाले ग्रामीण नहीं, बल्कि स्थानीय विधायक के ही समर्थक थें। और विरोध महज इसलिए हुआ क्योंकि उस स्थान पर बागबेड़ा और जुगसलाई के सर्वाधिक संख्या में श्रद्धालु छठ पूजा करने को जुटते हैं। अप्पू तिवारी ने कहा कि ये शाजिश थी छठ रोककर राज्य भर में गैरआदिवासी और आदिवासी के मुद्दे को भड़काने की।
छठ के समय अव्यव्यस्था को दुरुस्त करने के बजाय बयान बाजी में समय गवाने वाले लोग पार्टी सुप्रीमो से सिख ले जो जेल में रहते छठ व्रतधारियो के प्रति सच्ची निष्ठा रखते है ।

