
जमशेदपुर।


सरकारी और खासमहल जमीन के मामले मे राज्य सरकार क द्वारा लिए गए मालिकाना हक के फैसले पर राजनितीक बयान बाजी शुरु हो चुकी है।इस फैसले पर विपक्ष तो राज्य सरकार को घेरने का मन बना ही रही थी कि राज्य सरकार के मंत्री सरयू राय़ नें इस नियम पर आपत्ती जता दी है। वे जमशेदपुर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारो से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार के द्वारा लिए गए इस निर्णय काफी अच्छा बताते हुए कई सवाल भी खड़े कर दिए है। उन्होने कहा कि यह निर्णय और अच्छा हो सकता था। उन्होने कहा कि इस मामले को लेकर 19 फरवरी को बैठक की और 20 फरवरी को कैबिनेट मे आ गया । कैबिनेट मिंटिग मे विधी विभाग की भी राय नही ली गई। सरकार ने इस मामले जल्दबाजी में फैसला लिया है। उन्होने कहा कि इस निर्णय मे सरकार को थोड़ा गहराई में जाकर और अच्छा किया सकता है। उन्होने कहा कि जो भी गरीब लोग है उसको पांच डिसीवल का पट्टा का मालिकाना हक सरकार को दे देना चाहिए। और पांच डिसीवल से ज्यादा वाले जमीन पर कब्जा किया है उनको सरकार लीज देदे। उन्होने कहा कि इसका कटऑफ डेट 1984 1984 के जगह राज्य का निर्माण जिस दिन हुआ उस दिन कर देना चाहिए। ताकि इस योजना से ज्यादा से ज्यादा लोग लाभांवित हो सके । इस प्रकार सरकार कार्य करती है तो सरकार का नाम और होगा।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने शहर मे रहने वाले लोगो के लिए सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर रहने वाले लोगो की जमीन को नियमीत किया जाने के फैसला लिया है। लेकिन कैबिनैट के फैसले के अनुसार 10 डिसीमल जमीन तक आवासीय अतिक्रमण नियमीत होगा।

