
,सरयू उपायूक्त को पत्र लिखा
जमशेदपुर।
टाटा सब लीज का मामला एक बार फिर गरमाने लगा है।इस मामले को 27 जून को उपायूक्त कार्यलय मे हुई बैठक पर जमशेदपुर (पश्छिम) के विधायक सह मंत्री सरयू राय ने अपनी आपत्ती प्रकट की है और उपायुक्त को पत्र लिखा है ।कि
समाचार माध्यमों से सूचना मिली है कि सरकार के निर्देशानुसार 59 टाटा सबलीज मामले मे राज्य को हुये राजस्व की क्षति का आकलन करने और सलामी निर्धारण करने के लिये एप्रोप्रियेट मशीनरी कमिटी की बैठक 27 जून 2017 को आपकी अध्यक्षता मे हुई है.


आपको मालूम है कि टाटा लीज़ समझौता की कंडिका- 8 मे सबलीज का निर्धारण करने हेतु एप्रोप्रियेट मशीनरी कमिटी का प्रावधान किया हुआ है. आपको यह भी मालूम है कि माननीय झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा WP(C) No. 6138/2012 में दिनांक 17.12.2014 को पारित आदेश के आलोक में राजस्व विभाग की अधिसूचना ज्ञापांक- 549/रा० दिनांक – 21.02.2015 एवं ज्ञापांक- 1915 रा०, दिनांक 7.5.215 द्वारा आयुक्त कोल्हान प्रमंडल की अध्यक्षता में गठित कमिटी ने टाटा लीज़ के अंतर्गत 59 सबलीज भूमि के आवंटन के मामले की जांचकर जांच प्रतिवेदन आयुक्त कोल्हान के पत्रांक738(बी०), दिनांक 20.05.2015 द्वारा राजस्व विभाग को सौंपा है. इस 5 सदस्यीय जांच समिति मे पूर्वी सिंहभूम ज़िला के उपायुक्त भी शामिल रहे हैं. जांच का प्रतिवेदन कुल 6 खंडों में है, जिसमें 956 पृष्ठ हैं. इस प्रतिवेदन के साथ कुल 26 खंडों में 3352 पृष्ठों के अनुलग्न के रुप में हैं. यानी इस जांच समिति ने गहन जांच की है और प्रमाण के रूप में आवश्यक काग़ज़ात भी प्रतिवेदन के साथ संलग्न किया है.
जांच समिति ने स्पष्ट किया है कि टाटा लीज़ समझौता की कंडिका-8 में सबलीज का प्रावधान किया गया है, परन्तु ऐसा कोई प्रावधान बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 मे नही है जिसके अंतर्गत टाटा लीज़ समझौता हुआ है. टाटा लीज़ समझौता झारखंड मंत्रिपरिषद की स्वीकृति से हुआ है जबकि बिहार भूमि सुधार अधिनियम 1950 और टाटा स्टील को लीज़ पर ज़मीन देने के लिये इसे संशोधित कर इसमें जोड़ी गईं धारा 7डी और 7इ को विधान सभा की स्वीकृति और संविधान का संरक्षण प्राप्त है. भारत के संविधान की 9वीं अनुसूची मे प्रविष्टि के कारण बिहार भूमि सुधार अधिनियम 1950 संविधान की धारा 31 बी के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त अधिनियम है. इस प्रकार
टाटा लीज़ समझौता की कंडिका-8 मे किया गया सबलीज का प्रावधान विधिसम्मत एवं संविधान सम्मत नही है और इसके तहत लिया जानेवाला कोई भी निर्णय संविधानसम्मत और विधिसम्मत नही होने के कारण लागू किये जाने योग्य नहीं है.
इतना ही नही, टाटा लीज़ समंझौता मे केवल ख़ाली भूमि, जो लीज़ समझौता के शिड्युल- 5 मे रखी गई है, पर सबलीज देने का प्रावधान है. परंतु 59 सबलीज मामले मे लीज़ समझौता के शिड्युल 1,2,3 और 4 की भूमि पर भी सबलीज दे दी गयी है. बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 7डी मे ख़ाली भूमि का ज़िक्र भी नही है. इसमें यही कहा गया है कि लीज़ समझौता के शिड्युल 1,2,3,4 मे रखी गयी भूमि के अतिरिक्त भूमि को, कंपनी के लिये जरुरत होने पर, राज्य सरकार की पूर्व अनुमति से कंपनी को उसके उत्पादन कार्य के उद्देश्य से लीज़ पर आवंटित किया जा सकता है. यही ख़ाली ज़मीन टाटा लीज़ समझौता के शिड्युल5 मे है. सबलीज का उल्लेख बिहार भूमि सुधार अधिनियम की धारा 7इ मे है जो केवल उस ज़मीन तक सीमित है जिसे 1970 के पहले मालिक होने के कारण टिस्को ने कई लोगों और संस्थाओं को कई प्रकार के उपयोग के लिये लीज़ पर दिया था. जब ज़मीन का मालिक सरकार हो गई और टाटा स्टील/टिस्को ज़मीन का लीजधारी हो गया तब 1970 के पूर्व के लीजधारी टाटा स्टील के सबलीजधारी हो गये. इसके अलावा अधिनियम मे कही भी सबलीज का जिक्र नही है. इस तरह टाटा लीज़ समझौता की कंडिका-8 के तहत दिये गये 59 सबलीज अवैध हैं.
जांच समिति के प्रतिवेदन पर राज्य सरकार ने महाधिवक्ता का परामर्श प्राप्त किया है. महाधिवक्ता ने टाटालीज समझौता के संविधान सम्मत नही होने के बिंदु पर मौन साध लिया है. इसके अलावा टाटा स्टील द्वारा बरती गई क़रीब डेढ दर्जन अन्य अनियमितताओं का पर्दाफाश भी इस परिप्रेक्ष्य मे जांच समिति ने किया है. जांच समिति के अनुसार तथाकथित 59 सबलीज मामलों में कुल 144.33 एकड़ भूमि सन्निहित है, जिसका बाज़ार मूल्य सबलीज होने की तिथि को 1,00, 53,87,800 ( एक सौ करोड़ तिरपन लाख सतासी हज़ार आठ सौ) रूपया और जांच प्रतिवेदन सौंपने की तिथि यानी 21.5.2015 को 7899342499 (सात अरब निवासी करोड़ तिरानबे लाख बयालीस हज़ार चार सौ निवानबे) रूपया है. इस मूल्य की गणना ज़िला अवर निबंधक कार्यालय के द्वारा अधिसूचित मार्गदर्शिका पंजी के आधार पर की गई है.
इसके अतिरिक्त जांच समिति ने पाया है कि टाटा स्टील ने क़रीब डेढ़ दर्जन बिन्दुओं पर लीज़ समझौता के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन किया है. समिति ने अपने प्रतिवेदन मे टाटा लीज़ समझौता की कंडिका-24 को उद्धृत किया है और तदनुसार कारवाई करने के लिये कहा है.
जांच समिति ने स्पष्ट अनुशंसा किया है कि चुकि टाटा लीज़ समझौता के अनुसार लीज़ भूमि पर संपूर्ण स्वामित्व राज्य सरकार का है इसलिये लीज़ समझौता की कंडिका- 8 के तहत असंवैधानिक तरीका से दिये गये सभी 59 सबलीज की भूमि को लीज़ से बाहर निकालते हुये सरकार इसे अपने क़ब्ज़ा मे ले ले और यदि तथाकथित सबलीजधारी तैयार हों तो नियमानुसार फ़र्स्ट राइट ऑफ़ रिफ्युजल के सिद्धांत के अनुसार इस ज़मीन को उन्हे बंदोबस्त कर दे. यदि लीजधारी इसपर तैयार नही है तो नीलामी के माध्यम से इस ज़मीन को नियमानुसार किसी पात्र अभ्यर्थी को बंदोबस्त कर दे और इस ज़मीन पर खड़े संरचना का विधिसम्मत मूल्याँकन कराकर इसका मूल्य उसे लौटा दें जिसने यह निर्माण कराया है.
इसपर महाधिवक्ता ने प्रतिकूल टिप्पणी की है और मंतव्य दिया है कि भूमि को सबलीज मे रखते हुये सलामी लेकर इसे उसी सबलीजधारी को सबलीज पर दे दिया जाय. इसी सलामी का निर्धारण करने के लिये सरकार के निर्देशानुसार आपने एप्रेप्रियेट कमिटी की बैठक कल 27.6.2017 को बुलाया था.
उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि सभी प्रासंगिक ५९ सबलीज संविधान और नियम के विरूद्ध आवंटित किये गये हैं. आयुक्त कोल्हान की जांच समिति ने इस दस्तावेज़ी प्रमाण के आधार पर संपुष्ट किया है. महाधिवक्ता का मंतव्य इस बिन्दु पर मौन है. जांच समिति के अन्य अन्य बिंदुओं पर भी महाधिवक्ता का मंतव्य स्वीकार करने योग्य नही है.
• चुकि उपायुक्त पूर्वी सिहभूम भी आयुक्त कोल्हान की अध्यक्षता मे इस प्रसंग मे गठित ५ सदस्यीय समिति के सदस्य रहे हैं और जांच समिति के प्रतिवेदन से सहमत हैं, इसलिये असंवैधानिक एप्रोप्रियेट कमिटी के द्वारा सलामी का निर्धारण कराने की पहल करने के बदले आप उपर्युक्त विवरण के आलोक मे राजस्व एवं भूमिसुधार विभाग, झारखंड सरकार से उचित मार्गदर्शन माँगे और आयुक्त कोल्हान की जांच समिति की अनुशंसाओं के मद्देनजर इस मामले मे शीघ्र संविधानसम्मत एवं विधिसम्मत क़ारवाई करें ताकि लंबे समय से लटके मामले का समाधान हो जाय और 59 सबलीज की ज़मीन को टाटा लीज़ से बाहर निकालकर इसे उपयुक्त तरीक़ा से पात्र दावेदारों को स्थायी रूप से बंदोबस्त किया जा सके. ऐसा करने से जमशेदपुर मे मालिकाना हक़ की चिरलंबित समस्या के समाधान का रास्ता भी खुलेगा.

