
जमशेदपुर।


टाटा स्टील जूलोजिकल पार्क में एक सप्ताह के अंदर दो बाघिन की मौत हो गई थी। दोनों की मौत का कारण बेबिसियोसिस नामक बीमारी बताई गई थी। हालांकि मौत की वजह को लेकर टाटा जू प्रबंधन भी संशय में था, लिहाजा उसने इस मामले में नई दिल्ली स्थित केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सेंट्रल जू अथॉरिटी) से मदद मांगी थी। इस पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने कोलकाता स्थित कलकत्ता इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड वेटरनरी बायोलाजिकल्स के डॉ. मृत्युंजय मंडल व डॉ. प्रलय मंडल की टीम को भेजा था। टीम शुक्रवार को कोलकाता लौट गई। टाटा जू के निदेशक विपुल चक्रवर्ती ने बताया कि टीम दो बाघ, एक शेर और एक तेंदुए का ब्लड सैंपल ले गई है। हालांकि बेबिसियोसिस नामक बीमारी से दो बाघ की ही मौत हुई थी, लेकिन टीम यह देखना चाहती है कि आसपास के बाड़ों में रहने वाले अन्य जानवरों में भी एक ही तरह के बैक्टीरिया हैं कि नहीं।जासं., जमशेदपुर : टाटा स्टील जूलोजिकल पार्क में एक सप्ताह के अंदर दो बाघिन की मौत हो गई थी। दोनों की मौत का कारण बेबिसियोसिस नामक बीमारी बताई गई थी। हालांकि मौत की वजह को लेकर टाटा जू प्रबंधन भी संशय में था, लिहाजा उसने इस मामले में नई दिल्ली स्थित केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सेंट्रल जू अथॉरिटी) से मदद मांगी थी। इस पर सेंट्रल जू अथॉरिटी ने कोलकाता स्थित कलकत्ता इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड वेटरनरी बायोलाजिकल्स के डॉ. मृत्युंजय मंडल व डॉ. प्रलय मंडल की टीम को भेजा था। टीम शुक्रवार को कोलकाता लौट गई। टाटा जू के निदेशक विपुल चक्रवर्ती ने बताया कि टीम दो बाघ, एक शेर और एक तेंदुए का ब्लड सैंपल ले गई है। हालांकि बेबिसियोसिस नामक बीमारी से दो बाघ की ही मौत हुई थी, लेकिन टीम यह देखना चाहती है कि आसपास के बाड़ों में रहने वाले अन्य जानवरों में भी एक ही तरह के बैक्टीरिया हैं कि नहीं।

