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*उप समिति द्वारा जिले में जनजातीय समुदाय की आबादी में निरंतर ह्रास पर समीक्षा की गई- जिला के प्रबुद्ध जनों ने किया मंथन*
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जमशेदपुर।
झारखंड जनजातीय परामर्शदातृ परिषद् की उप समिति की बैठक आज जिले के समाहरणालय सभागार में उप समिति के अध्यक्ष सह मंत्री, झारखंड सरकार श्री नीलकंठ सिंह मुंडा की अध्यक्षता में आहूत की गई। उक्त बैठक में जिले में जनजातीय समुदाय की जनसंख्या में आजादी के बाद से विगत जनगणना तक हो रहे ह्रास पर मंथन किया गया। इस अवसर पर कई विद्वान, शिक्षाविद् सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधि, जनजातीय कला संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले विद्वत्-जन, प्रबुद्ध व्यक्ति और जिला प्रशासन के पदाधिकारी गण उपस्थित थे। उप समिति की सदस्य सह मांडर विधायक श्रीमती गंगोत्री कुजूर, सदस्य रतन तिर्की, पोटका विधायक श्रीमती मेनका सरदार, घाटशिला के विधायक श्री लक्ष्मण टुडू और बहरागोड़ा के विधायक श्री कुणाल षाड़ंगी मंथन में शामिल हुए। प्रबुद्ध जनों के द्वारा पूर्वी सिंहभूम में जनजातीय समुदाय की कमतर होती जनसंख्या के पीछे कई कारणों को उत्तरदाई बताया गया।
इस अवसर पर उपायुक्त अमित कुमार ने कहा कि एक महत्वपूर्ण रूप से चुनौती से जिस अनुपात में अन्य समुदायों की संख्या बढ़ी है उस अनुपात में जनजातीय समुदाय की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज नहीं की गई है जिसके कई कारण उन्होंने बताए। मृत्यु दर का अधिक होना एवं जीवन प्रत्याशा का न्यून होना एक बड़ा कारण उन्होंने बताया। उपायुक्त ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पूर्ण सुविधा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हमारे जनजातीय समुदाय प्रकृति से जुड़े हुए हैं और जितनी उन्नत संस्कृति को संजोया है, अपनी जीवनशैली भी उसी के अनुरूप विकसित करें तो इसके सुखद परिणाम सामने आएंगे। उपायुक्त ने स्वास्थ्य में सुधार के लिए नशाबंदी की बात कही। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय प्रकृति से नजदीकी के कारण कई ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं जो कि स्वास्थ्यप्रद हैं। उपायुक्त ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन के बाद से जमशेदपुर के शहरी क्षेत्र में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या घटी है और भारत एक सोशलिस्ट राष्ट्र होने के कारण यह प्रयास रहा है कि विगत सदी में हुए विकास में किसी भी रूप से जनजातीय समुदाय अछूता ना रहे। इसके लिए कौशल विकास प्रशिक्षण के द्वारा हुनर विकसित करने पर फोकस किया जाए। झारखंड जनजातीय जनसंख्या बहुल राज्य है इसलिए यहां पर जनजातीय समुदायों के लिए अवसरों की सुलभता सोना और उनका उपयोग भी बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक जनचेतना फैलाने की भी जरूरत है कि विश्व में सर्वोत्तम उदाहरण हैं वह इस समाज में मौजूद हैं। जन चेतना के माध्यम से एकीकरण की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए जिससे जनजातीय समुदायों के आत्मविश्वास में अभिवृद्धि होगी जिससे उनकी भूमिका एवं समाज में उनकी उपस्थिति में भी व्यापक सुधार होगा। उपायुक्त ने कहा कि आज प्रबुद्ध जनों ने जो विचार व्यक्त किए सभी सुझावों को गंभीरता पूर्वक लेते हुए जिला स्तर की बातों पर निश्चित रूप से संज्ञान लेते हुए काम होगा।
इस अवसर पर मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि उपसमिति इस बात के अध्ययन के लिए आई है कि जनजातीय समाज की जनसंख्या में जो कमी दर्ज की गई है उसके लिए विभिन्न वर्गों समुदायों के लोगों के विचारों को समाहित करते हुए एकीकृत रूप से प्रतिवेदन तैयार करके सरकार को सौंपा जाए। उन्होंने टाटा मोटर्स में एसटी के प्रतिनिधित्व, आजादी के बाद से संप्रति तक आदिवासी समुदायों की जन्म दर एवं मृत्यु दर का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया, शहरीकरण का क्षेत्रफल आजादी के समय और अभी क्या है, तथा जनजातीय जमीन की वस्तु स्थिति से संबंधित प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने जिला स्तरीय कार्यशाला के आयोजन का निर्देश दिया जिसमें ऐसे लोगों को शामिल किया जाए जो विषयों को सटीक एवं तर्क संगत तरीके से रखें जिसमें जनजाति के साथ साथ अन्य समुदायों के लोगों को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में उपस्थित प्रबुद्ध जनों की परिचर्चा से जनजातीय जनसंख्या में ह्रास के कई तथ्य उभरकर सामने आए। पलायन एवं शहरीकरण से जनजातियों की पहचान एवं उनकी अमूल्य संस्कृति का ह्रास, शहरी स्लाम क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली जनसंख्या की गणना नहीं हो पाना, अत्यधिक नशापान, अवैध शराब बिक्री, औद्योगिकरण, शहरीकरण को जनसंख्या के कमजोर होने के लिए प्रमुख कारण बताया गया। जिले की कुल 22,93,000 जनसंख्या में से 12,00,000 शहरी आबादी है शहरीकरण के कारण ज्यादा प्रभाव शहरी जनसंख्या में दिखाई देता है। जहां विस्थापन, पलायन, शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण जनजातीय जनसंख्या के प्रतिशत में कमी दिखाई देती है। इसी अवधि में 10,00,000 की ग्रामीण जनसंख्या में लगभग 50% जनजातीय जनसंख्या का है। मुख्य रूप से या जनांकिकीय बदलाव शहरीकरण के कारण आया है। पलायन एवं बाहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में टाटा स्टील, टाटा मोटर्स एवं टाटा की अन्य अनुषंगी इकाइयों में नियोजन के बड़े अवसरों ने बाहर से बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित किया है जो जनजातीय जनसंख्या के कम प्रतिशत का एक कारण है। प्रबुद्ध जनों द्वारा यह सुझाव दिया गया कि *जनगणना के समय स्थानीय लोगों को शामिल किया जाए और ऐसे लोगों को इस कार्य में नियोजित किया जाए जो कि स्थानीय भाषा के भी जानकार हों।* जनगणना के समय कहीं अन्यत्र कार्य के लिए प्रवासन, अवैध शराब बिक्री विशेषकर शहरी क्षेत्र में। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिकरण, खनन एवं औद्योगिकरण टाटा एवं अनुषंगी इकाइयों के कारण जो विस्थापन हुआ है तो कहीं ना कहीं अधिक अनुपात में कुशल जनसंख्या बाहर से आकर के बस गई है।
इस अवसर पर विधायक लक्ष्मण टुडू ने कहा कि जनजातीय परामर्शदातृ परिषद के अस्तित्व में आने के बाद से जनजातीय समुदाय कैसे आगे बढ़ेगा और जनजातीय समुदाय के चहुंमुखी विकास के लिए और उनके सामाजिक आर्थिक राजनीतिक विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अवैध शराब, नशा सेवन जैसी समस्याओं पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। विभिन्न विचारों को ले कर समीक्षात्मक रूप से विश्लेषण करते हुए आदिवासी जनसंख्या के ह्रास के मूल कारण की विवेचना की जाएगी। पोटका विधायक श्रीमती मेनका सरदार ने कल कारखानों के विकास के क्रम में जनजातियों को स्थान ना मिल पाने को जनसंख्या में कमी का एक बड़ा कारण बताया जिस पर मंथन किया जाएगा।

