
जमशेदपुर,
साल के अंतिम दिन सन् 2017 का ‘कविवर निर्मल मिलिंद पुरस्कार’ देश के जानेमाने साहित्यकार डा0 सी. भास्कर राव को प्रदान किया गया। कल चेम्बर आॅफ कामर्स के सभागार में आयोजित समारोह में प्रसिद्ध कथाकार श्रीमती निर्मला ठाकुर के कर कमलों द्वारा डा0 राव को पुरस्कार दिया गया। इस अवसर पर युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता कथाकार जयनंदन, श्री कृष्ण सेवा संस्थान के महासचिव हरिवल्लभ सिंह आरसी, चिंतक व लेखक लक्ष्मी निधि, संपादक दिनेश्वर प्रसाद सिंह दिनेश वगैरह मौजूद थे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमती निर्मला ठाकुर ने कहा कि कविवर निर्मल मिलिंद हमेशा विघटनकारी शक्तियों के खिलाफ खड़े रहे। उन्होंने उनका प्रतिरोध किया। श्रीमती ठाकुर ने कहा कि वे कई विधाओं में लिखते थे और बहुमुखी प्रतिभाओं के धनी थे। शहर की सभी साहित्यिक संस्थाओं से वे जुड़े थे। बज्जिका का पहला उपन्यास ‘गितिया’ उन्होंने लिखा था। उन्होंने डा0 राव के बारे में कहा कि उन्हें किसी को मना करना नहीं आता। अपनी दुर्बलता स्वीकारने में भी उन्हें परहेज नहीं होता। उन्होंने इस मौके पर कविवर निर्मल मिलिंद की कविता सुनाई।
सम्मानित अतिथि डा0 सी. भास्कर राव ने कहा कि कुछ लोग संसार में न होकर भी हमारे भीतर ज्यादा होते हैं भाई निर्मल भी ऐसे ही थे। उनका साहित्य के प्रति समर्पण रहा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कार्यक्रम एक यज्ञ होता है। कितना बड़ा साहित्यकार क्यों न हो, वह अपने शहर अपने घर में किंचित उपेक्षित माना जाता है। जब वह साहित्यकार अपने शहर अपने घर में सम्मानित होता है तो बाहर के लाखों रुपयों के सम्मान से घर का सम्मान बड़ा होता है। उन्होंने कहा कि वे ऐसा महसूस कर रहे हैं कि यह उनका सम्मान नहीं सारे साहित्य जगत का सम्मान है। उन्होंने अपील की कि जमशेदपुर के राष्ट्रीय स्तर के कहानिकार गुरुवचन सिंह और संपादक राघव आलोक के नाम पर भी सम्मान समारोह का आयोजन किया जाए। डा0 राव ने कहा कि सम्मान की राशि कोई मायने नहीं रखती। साहित्यकार के लिए एक रुपया और एक लाख रुपया एक समान होता है।
अपने बारे में उन्होंने कहा कि वे पचास सालों से लिख रहे हैं और उनकी पचास पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने कहा कि वे यह स्वीकार करते हैं के वे औसत लेखक हैं, असाधारण प्रतिभा के या महान लेखक नहीं हैं। इसी तरह उनके प्रकाशक भी औसत हैं। उन्होंने कहा कि अबतक वे स्वांतः सुखाय लिखते थे पर अब उन्होंने इसे सीमित कर दिया है अब वे फेसबुक पर कवियों, लेखकों और मित्रों के हित में लिख रहे हैं। जो कवितायें उन्हें झकझोरती हैं जो कहानियाँ उन्हें आंदोलित करती हैं वे उन्हें लिखते हैं।
जयनंदन ने इस अवसर पर कहा कि कविवर निर्मल मिलिंद के निधन से काव्य जगत को भारी क्षति हुई है। उनकी कई विधाओं में पकड़ थी, वे मिलनसार थे और जूनियर सीनियर नहीं देखते थे। जयनंदन ने डा0 राव के बारे में कहा कि वे कभी गुस्सा नहीं होते, कभी असहमत नहीं होते फिर भी लिख कैसे लेते हैं यह समझ नहीं आता। जयनंदन ने कहा कि नरेंद्र कोहली और वीर भारत तलवार उनके अभिन्न मित्र हैं पर कभी उन्होंने उनसे फायदा नहीं उठाया। डा0 राव ने कई विधाओं में लिखा किसी एक विधा को पकड़ कर अपना कैरियर बनाने की उन्होंने परवाह नहीं की।
हरिवल्लभ सिंह आरसी ने कहा कि उन्होंने निर्मल मिलिंद को हमेशा समाज के लिए चिंतित देखा घर के लिए कभी नहीं। ऐसा साहित्यकार कभी नहीं मरता।
प्राचार्य जूही समर्पिता ने कहा कि इस पुरस्कार के आयोजनकर्Ÿाा ने कविवर निर्मल मिलिंद को अमर कर रखा है। यह पुरस्कार आने वाले कई वर्षों तक कई साहित्यकारों को लिखने के लिए प्रेरित करता रहेगा। लक्ष्मी निधि ने कविवर निर्मल मिलिंद के बारे में अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। समारोह का संचालन दूरदर्शन और आकाशवाणी के पत्रकार राजेश कुमार लाल दास ने किया। धन्यवाद ज्ञापन साहित्यकार अशोक शुभदर्शी ने किया।

