
जमशेदपुर: 9 जुलाई, संताली के प्रसिद्ध साहित्यकार व झारखंड राज्य आदिवासी परामर्शदात्री समिति के सदस्य प्रोफेसर दिगंबर हाॅसदा की पुत्री सुश्री तुलसी हाॅसदा का निधन 9 जुलाई को सुबह साढ़े 7 बजे ब्रह्मानंद अस्पताल, तमोलिया में हो गया। वे 37 साल की थीं तथा इन दिनों चाईबासा में कामर्शियल टैक्स विभाग में असिस्टेंट कामर्शियल टैक्स अफसर के पद पर कार्यरत थीं। वे पिछले कुछ सालों से किडनी के रोग से पीडि़त थीं। एक सप्ताह पहले तेज दर्द होने पर उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया।


झारखंड राज्य की पहली जेपीएसई परीक्षा पास कर उन्होंने दुमका, रांची और चाईबासा में एसीटी अफसर के पद पर योगदान दिया। वे काफी सख्त अफसर मानी जाती थीं। उन्होंने चाईबासा के राजनीतिक पहुँच रखने वाले एक दबंग खनन व्यापारी के कई ट्रक पकड़ कर सनसनी पैदा कर दी थी। कहते हैं कर्तव्य निभाने के दौरान वे किसी तरह का दबाव बर्दाश्त नहीं करती थीं।
सुश्री तुलसी हाॅसदा ने रांची विश्वविद्यालय से फिलाॅसफी में पोस्ट ग्रेजुएट किया था, इसमें वे प्रथम श्रेणी में पास हुईं व विश्वविद्यालय में सेकेन्ड टाॅपर रहीं। प्रोफेसर दिगंबर हाॅसदा बताते हैं कि यह सब उसने घर का काम संभालते हुए किया। उसकी मा पार्वती हाॅसदा 2005 में स्वर्ग सिधार गईं। उससे पहले वे करीब 5 सालों तक बीमार रहीं। तब तुलसी 20-22 साल की थी परंतु उसने घर की सारी जिम्मेदारी उठा ली। इसी स्थिति में पढ़ाई की व नौकरी की। मा की मौत के बाद तुलसी ने सिर्फ इसलिए विवाह नहीं किया कि उसके ससुराल जाने के बाद पिता जी (प्रोफेसर दिगम्बर हाॅसदा) को कौन संभालेगा।
तुलसी अपने पिता व परिवार के लोगों के सामने अपनी बीमारी को अपने ऊपर हावी नहीं होने देती थीं। उनमें गजब की सहनशीलता होने की बात उसके परिजन बताते हैं। तुलसी के दो भाई व दो बहनें हैं।
तुलसी को श्रद्धांजलि अर्पित करने कामर्शियल टैक्स विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर डीएन साहा, डीसी आईडी अरविन्द कुमार पूरी टीम के साथ उनके घर पहुँचे। भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रमेश हाॅसदा, आप के नेता कुमार चंद मार्डी, जेवीएम के नरेश मुर्मू, झापा के डीसी मुर्मू, राजाराम हाॅसदा, रतन चंद्र भट्टाचार्जी, शिक्षाविद् अमीयो दंडपथ वगैरह लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका अंतिम संस्कार पार्वती घाट पर हुआ।

