
सिमरी बख्तियारपुर,सहरसा, ब्रजेश भारती !
दूर-दूर तक कफन की तरह फैला बालू। जहां तक नजर पहुंचे वहां तक बस पानी ही पानी। दूर-दूर बसे टोले और खेतों में लहराती मकई की फसल के बीच गूंजती घोड़े की टाप उस पर घोड़ों पर बंदूक थामे अपराधियों की टोली। कोसी दियारा में यह दृश्य आज भी आम है। यहां जल, जलकर और जमीन पर कब्जे को लेकर अपराधी गिरोहों की जुगलबंदी होती है तो यही अदावत का कारण भी बनती है। शुक्रवार को महादलितों के आशियाने उजाड़े जाने के बाद एक बार फिर कोशी का यह दियारा ईलाका फिर चर्चा का विषय बन गया है। शुक्रवार की घटना आगे क्या रंग लाती है यह तो समय के गर्त में है लेकिन एक बात तो फिर साबित हो गई है की जल,जलकर और जमीन पर अपनी वर्चस्व को लेकर यह दियारा क्षेत्र हमेशा प्रशासन के लिये सिरदर्द बना रहा है।
शुक्रवार की घटना को भुना सकता है लाल आतंक-
इस घटना के बाद जानकारों का मानना है कि अभी जिस प्रकार का माहौल है ऐसे में लाल आतंक शुक्रवार की घटना को भुना अपना उजड़ा आधिपत्त फिर से जमाने की जुगत में सक्रिय हो सकता है ।चुकिं इस समय कोशी दियारा में लाल आतंक का सबसे बड़ा खतरा कुख्यात रामानंद यादव गिरोह सिथिल होना हो सकता है।चुकि इस गिरोह की कमर एसटीएफ के आपरेशन के बाद टुट गया है। ऐसे मौके का फायदा लाल आतंक उठा ले तो कोई आश्चर्य नही होगा।
दियारा की गैर मजरूआ आम व खास जमीन –
इस दियारा की अधिकांश जमीन खगड़िया,बेगूसराय व सहरसा के लोगों की है।सबसे अधिक जमीन बेगूराय जिले के रधुनाथपुर,खगड़िया जिले के नया टोल,अलौली,सैयदपुर,बन्नी,मानसी आदि के लोगों की है। शुक्रवार को जिस जमीन पर ये वारदात हुआ वह नया टोल के अनिल सिंह का बताया जाता है यह जमीन हाल सर्वे के आधार पर बिहार सरकार का हो गया है स्थानिय महादलितों ने बिहार सरकार की जमीन को समझ उस पर अपना आशियाना बना रहने लगा लेकिन जमींदार ने सर्वे को कोर्ट में चुनौती दे रखा है।इसी को आधार बना कर जमींदार ने शुक्रवार की घटना को अंजाम दिया।
हाल सर्वे में त्रुटी –
कोशी दियारा की भगौलिक जमीन की बनावट हरेक साल आने बाले बाढ़ के पानी के साथ बदल जाती है जहां एक साल पहले फसल लहराती है वहा पानी आने के बाद नदी बहने लगती है।कभी भी यहां की खेतिहर जमीन का स्वरूप एक समान नही रहता है। उपरोक्त कारनों के बीच इस क्षेत्र की जमीन का हाल सर्वे सरकार ने फाईनल कर दिया।सर्वे के समय अधिकांश जमींदारों ने अपनी जमीन का कागजात प्रस्तुत नही किया जिसकी वजह से वेसे जमीन बिहार सरकार के खाते हो गई।कुछ लोगो ने अपनी जमीन यहां के लोगों के हाथों बेच दिया तो कुछ ने सर्वे को कोर्ट में चुनौती दे रखी है। इसी प्रकार की जमीन पर यहां के महादलित अपना निवास बना रहने लगते है ऐसे में जमींदारों को लगता है की जमीन पर अगर ये लोग कब्जा कर लेंगें तो फिर केश फाईनल हो जाने के बाद भी जमीन खाली कराना संभव नही होगा इस लिये पहले से ये लोग जमीन पर किसी को कब्जा होने देना नही चाहते है जिसका परिणाम शुक्रवार की घटना है।
संसाधनों की कमी से जूझती है पुलिस
दियारा इलाके में थाना व संसाधन की कमी के कारण पुलिस भी अपराधियों से खौफ खाती है। दियारा में गश्ती के लिए जिला पुलिस के पास न तो घुड़सवार दस्ता है और न ही पर्याप्त संख्या में पुलिस बल ही उपलब्ध है। चिरैया व कनरिया ओपी दियारा इलाके में है। यहां की पुलिस को पैदल ही गश्ती करनी पड़ती है। यहां तक की हाजत तक उपलब्ध नहीं है। अगर पुलिस कार्रवाई भी करना चाहती है तो अपराधियों के पास हथियार व गोली की संख्या की सूचना पर कार्रवाई करने से परहेज ही करती है।


