सहरसा-ऐतिहासिक ईस्लामिया उच्च विधालय गुटबाजी का हो गया शिकार

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ब्रजेश भारती

 

सहरसा सिमरी बख्तियारपुर ।

इस विधालय से पढ़े सैकड़ों छात्र आज देश विदेश में उच्च पदों पर है काबिज

अतित के आईने में इस विधालय कि पढ़ाई के चर्चे होते थे आज पठन पाठन मंद पड़ा हुआ हैं।

सहरसा जिले सहित आसपास के खगड़िया,मधेपुरा जिलों के मुस्लीम छात्रों मजहबी तालिम के साथ अच्छी शिक्षा देने के लिये मसहुर ईस्लामिया उच्च विधालय आज गुटबाजी के कारण शिक्षा व्यवस्था चैपट पड़ गई हैं। विधालय प्रबंध कमेटी की लड़ाई समाज से होकर न्यायालय तक पहुंच गई। विधालय में आने वाले फंड व अपना वर्चस्व बनाने कि लालच ने इस विधालय की शिक्षा व्यवस्था को गर्त में डाल दिया। करीब तीन बर्षो से अधिक समय तक विधालय प्रबंध कमेटी कि लड़ाई चलने के बाद माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में रविवार को प्रबंध कमेटी का चुनाव आमसभा के माध्यम से कराया गया जिसमे अध्यक्ष के रूप में खगड़िया सांसद चैधरी महबुब अली केसर एवं सचिव के रूप में प्रसि़द्ध समाजसेवी सैयद कसीम असरफ चुने गये।

आजादी से पूर्व हुई थी विधालय कि स् थापना-

ईस्लामियां उच्च विधालय कि स्थापना आजादी के दो वर्ष पूर्व 1945 में की गई थी इसकी स्वीकृति बिहार सरकार के बोर्ड आफ सेकेन्ड्री एजुकेशन ने 24 अप्रैल 1948 को दिया था। उस वक्त विधालय संचालन के लिये जो नियम कानुन बनाये गये थे उसी नियम के तहत वर्ष 2000-2001 तक विधालय का संचालन होता रहा। इस अवधी में विधालय संचालन व पढ़ाई के मामले में किसी भी उच्च विधालय को से अब्बल माना जाता था यहां से पढ़े हुये छात्र देश विदेशों में परचम लहड़ाते थे। आज भी यहां से पढ़े छात्र अरब देश में उच्च पदों पर कार्यरत हैं।

विधालय के संचालन विधान की हो गई चोरी-

विधालय स्थापना के समय जो विधान बनाया गया वह विधालय में उपल्बध नही है इस बात का पता 2001 में चला पर किसी ने उस विधान की खोज नही किया ना ही दोषी व्यक्ति की पहचान करना मुनासिब समझा। इसी बर्ष ख्वाजा गरीब नवाज एजुकेशन वेलफेयर सोसाईटी की स्थापना कर विधालय को इस संस्था से सम्बद्ध कर दिया गया लेकिन बिहार अराजकीय माध्यमिक विधालय प्रबंध एवं नियंत्रण ग्रहण अधिनियम की धारा 18(3) के कानुन के अनुसार संस्था का रजिट्रेशन कराना आवश्यक था लेकिन संस् था का रजिट्रेशन नही कराया गया

2000-2001 के बाद ट्रनिंग प्वाईंट-

समय के साथ विधालय गुटबाजी का अडडा बन गया,शिक्षा व्यवस्था पर किसी का ध्यान नही जा कर प्रबंध कमेटी पर चला गया। गुलाम फखरूद्धीन ने विधालय संचालन प्रबंध कमेटी के रूप में चौधरी तहिरूल हसन अध्यक्ष,मो क्वासीम उद्धीन उपाध्यक्ष एवं स्वयं सचिव के रूप में ख्वाजा गरीब नवाज एजुकेशन वेलफेयर सोसाईटी (जिसके सचिव नुर आलम थे) को कानुनी रूप से चुनौती दे डाली। कानुनी खेल के बीच न्यायालय ने दोनो के दावे को रद्ध करते हुये नये सिरे से विधालय प्रवंध कमेटी के गठन के साथ विधालय का नये सिरे से विधान बना कर उसका रजिट्रेशन कराने का आदेश जारी कर दिया।

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