
बेंगलुरू। बेंगलुरू एफसी और चेन्नइयन एफसी ने इत्तेफाक से हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के फाइनल में जगह नहीं बनाई है। सावधानी से टीम बनाना, सही चयन, उन खिलाड़ियों पर विश्वास करना जिन्हें वो जानते हैं, इन रास्तों ने दोनों टीमों को फाइनल में पहुंचाया है।


बेंगलुरू और चेन्नइयन इस पूरे सीजन में निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीमें रही हैं। लीग दौर में बेंगलुरू पहले तो चेन्नइयन दूसरे स्थान पर रही थीं।
दक्षिण भारत की दो टीमों कि खिलाड़ियों को चयन करने की मानसिकता एक समान ही रही है। दोनों टीमें लगभग एस जैसी लगती हैं। दोनों क्लबों के थिंक टैंक में खिलाड़ियों को चयन करने को लेकर यह बात ध्यान में थी कि जो खिलाड़ी वो चुन रहे हैं वो क्लब के कलचर और खेलने की शैली को अच्छे से जानते हों साथ ही पिछले सीजन से टीमों ने निरंतरता हासिल करने की कोशिश की और उनकी यह रणनीति काम आई।
बेंगलुरू ने जहां 11 खिलाड़ियों के रिटने किया तो वहीं चेन्नइयन 10 पुराने खिलाड़ियों को दोबार अपने साथ जोड़ने में सफल रही। अगर आप मैलिसन अल्वेस को गिनते हैं जो 2015 में चेन्नइयन की खिताबी जीत का अहम हिस्सा थे तो यह संख्या 11 पहुंच जाती है।
बेंगलुरू ने सुनील छेत्री और उदांता सिंह को रिटने किया। इनके अलावा उसने निशू कुमार और माल्साव्मजुआला को भी अपने साथ बनाए रखा। ड्राफ्ट में बेंगलुरू ने इस बात को सुनिश्चित किया कि हरमनजोत खाबरा, लेनी रोड्रिगेज, लालथुमवई राल्ते और एलवीन जॉर्ज भी टीम के साथ बने रहें।
विदेशी खिलाड़ियों को लेकर भी यही रहा। जॉन जॉनसन और जुआनन के रहने से टीम को सेंटर बैक में काफी फायदा हुआ। जॉनसन क्लब के साथ पहले दिन से ही हैं जबिक जुआनन कोच अल्बर्ट रोका के साथ 2016 में आए।
रोका भी टीम के साथ पिछले सीजन से बने हुए हैं और उनके साथ इस सीजन में अधीकतर वही खिलाड़ी हैं जिनके साथ वह काम कर चुके हैं। छेत्री, उदांता, लेनी, खाबरा यह सभी रोका की टीम के अहम सदस्य हैं।
टीम बनाने में चेन्नइयन एफसी ने भी वही रणनीति अपनाई। जेजे लालेपेखुलुआ, करणजीत सिंह, अनिरुद्ध थापा, जैरी लालरिंजुआला और बाओरिंगदाओ बोडो को क्लब ने रिटेन किया है।
धनपाल गणेश, धनचंद्रा सिंह, थोई सिंह और पवन कुमार, यह सभी पिछले सीजन से टीम का हिस्सा थे। टीम ने निरंतरता बनाए रखने के लिए ब्राजील के राफेल अगस्तो को इस साल भी अपने साथ ही रखा। वह 2016 में टीम से जुड़े थे।
हालांकि कोच जॉन ग्रेगोरी नए हैं, लेकिन वह आते ही बड़ी जल्दी टीम के खिलाड़ियों से घुल मिल गए और उन्होंने टीम में अपना एक अच्छा प्रभुत्व बना लिया। यह इस टीम की पूरे सीजन में सबसे अच्छी बात रही है और शनिवार को होने वाले फाइनल में जब वह बेंगलुरू एफसी के सामने उतरेंगी तो अपनी पुरानी रणनीति पर भरोसा करते हुए ही खिताब जीतना चाहेगी।

