जमशेदपुर।
मुख्यमंत्री के आदर्श ग्राम मोहरदा में लचर बिजली व्यवस्था को लेकर हम सभी बस्तीवासियों ने दलगत राजनीति (भाजपा,कांग्रेस और जेएमएमए के कार्यकर्ता है सभी इस बस्ती में) से ऊपर उठकर सर्वप्रथम गोविंदपुर ग्रिड का घेराव कर शांतिपूर्ण आंदोलन किया! अफसरशाही करने वाले कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए हमने पॉवर सप्लाई ठप्प करवाया! तब जाकर अवर प्रमंडल सहायक विद्युत अभियंता का आगमन तीन घंटे बाद गोविंदपुर ग्रिड में होता है और हमारे माँग पर अमल होता है! उसके अगले दिन शाम के वक्त फिर से बिजली जाती है और चार घंटे तक नहीं आती है! जब जेई और सहायक अभियंता को फोन किया जाता है तो कोई संतुष्टजनक जवाब नहीं मिलता है! तब हम सभी बस्तीवासी यह फैसला करते है कि हमें अपने क्षेत्र के विधायक सह मुख्यमंत्री से मिलकर इस समस्या को बताना चाहिए और हम सभी बस्तीवासी मुख्यमंत्री आवास जाते है! मगर वहाँ पहुँचकर साथ ही उनके सचिव द्वारा यह कहा जाता है कि रात हो चूकी है आप कल आ जाएँ! मोहरदा आदर्श ग्राम का अध्यक्ष द्वारा कहा जाता है कि सर आप जाकर उनसे यह कह दे कि मोहरदा की जनता आई है वह हमें मिल लेंगे! इसी बात पर उनके सचिव उखड़ जाते है और वहाँ सुरक्षा में तैनात उनके जवान हमें भगाने लगते है! एक बस्तीवासी वहाँ पर बैठने के लिए अड़ जाते है तो वहाँ तैनात जवानों द्वारा लाठी मारा जाता है और धक्का दिया जाता है! उसके बाद हम सभी बस्तीवासी वापस अपने अपने घरों पर आ जाते है और आज पता चलता है कि हम सभी के ऊपर अवर प्रमंडल सहायक विद्युत अभियंता द्वारा केस किया गया है! मैं पूछना चाहता हूँ
*क्या अपना हक माँगना गलत है?*
*क्या आदर्श ग्राम नाम के लिए बना है?*
*थाना प्रभारी की मौजूदगी में यह आंदोलन होता है तो फिर सरकारी कार्य में हमने कैसे बाधा डाली?*
*क्या इसे राजतंत्र ना कहा जाएँ?*
*आखिर हम जनता अपना हक किससे माँगे?*




