जमशेदपुर –मकर पर्व पर सोनारी में लगा टुसू मेला ,दोमुहानी में उमङा लोगो का हुजूम

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संवाददाता,जमशेदपुर.15 जनवरी

झारखंड सांस्कृतिक कला केन्द्र की ओर से मकर संक्रांति के मौके पर सोनारी दोमुहानी में विशाल टुसू मेला का आयोजन किया गया. इस मौके पर वहां सुबह तो लोगों ने पवित्र नदी में डूबकी लगाई तथा गरीबों में दान-पुण्य किये. दोपहर बाद से वहां आने वाले लोग मेला का आनंद उठाते रहे. यह क्रम देर शाम तक जारी रहा. मेला में टुसू की प्रतिमा तथा चौड़ल लेकर आनेवालों को पुरस्कृत भी किया गया. इस मौके पर अतिथियों के रुप में विद्युत वरण महतो, झामुमो के केन्द्रीय नेता मोहन कर्मकार आदि मौजूद थे. सभी वक्ताओं ने झारखंड की संस्कृति व परंपरा की प्रतीक टूसू पर्व की महत्ता को कायम रखने की अपील लोगों से की. बाद में टुसू प्रतिमा व आकर्षक चौड़ल बनानेवालों को पुरस्कृत किया गया. इसमें टुसू प्रतिमा के विजेताओं को प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय को क्रमश: 21 हजार, 15 हजार तथा 10 हजार तथा चौड़ल के एक विजेता को 5 हजार नगद राशि पुरस्कार स्वरुप दी गई. यहां झारखंड सहित सरायकेला-खरसावां तथा ओडि़सा के लोग भी आये थे.  साथ ही आगामी 21 जनवरी को गोपाल मैदान में आहूत टुसू महोत्सव में सभी को आने की अपील भी की. मेला में कई तरह के दुकान सजे थे, जिसमें खाने-पीने से लेकर बच्चों के लिये खिलौने, गुब्बारा, सजावट की वस्तुएं आदि मुय है. कुछ दुकानों में महिलाओं के लिये सामान थे तो कहीं रंग-बिरंगा गुब्बारा बच्चों को लुभा रहे थे. मेले में आनेवाली चौड़ल व टुसू प्रतिमा काफी आकर्षक ढंग से सजाई गई थी. चौड़ल तो लोगों ने अपने साथ लाये थे, लेकिन टुसू की प्रतिमा वाहनों में सवार होकर लाये गये थे. कुछ-कुछ मूर्ति तो इतनी आकर्षक थी कि उससे नजर ही नहीं हट रही थी. मेले में आनेवालों का स्वागत करने के लिये सोनारी कागलनगर एवं मेरिन ड्राइव से दोमुहानी जानेवाले सड़क में कई तोरण द्वारा बनाये गये थे. वैसे तो इसमें सभी राजनीतिक दलों द्वारा बनाया गया था. दोमुहानी मेला में कई तरह के दुकान सजे थे, जिसमें खाने-पीने से लेकर बच्चों के लिये खिलौने, गुब्बारा, सजावट की वस्तुएं आदि मुय थे. कुछ दुकानों में महिलाओं के लिये सामान थे तो कहीं रंग-बिरंगा गुब्बारा बच्चों को लुभा रहे थे. मेला में दोपहर लगभग 1 बजे से संध्या 6 बजे तक हजारों लोग आये तथा अपने-अपने अनुसार खुशियां मनाकर घर लौटे. वैसे तो सुबह से ही लोगों का  वहां आना आरंभ हो गया था, लेकिन दोपहर बाद वहां तिल रखनेे की भी जगह नहीं थी. कोई पैदल तो कोई वाहनों से वहां आकर मेला का आनंद उठाते नजर आये.

 

 

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