
विशेष घास और धागे से बनी इन सुन्दर कलाकृतियों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास


जमशेदपुर।
मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय के उपसमाहर्ता संजय कुमार ने शनिवार को पोटका प्रखंड के दूरस्थ गांव जानमडीह पहुंचकर यहाँ हस्तशिल्प के काम में लगे दर्जनों ग्रामीण महिला पुरुषों के साथ बैठक की। दरअसल जिला मुख्यालय से 46 किमी और पोटका प्रखंड मुख्यालय से 25 किमी दूर स्थित भूमिज आदिवासी बस्ती जानमडीह के एक सैकड़ा से अधिक महिला और पुरुष कारीगर स्थानीय घास और धागे की मदद से सुन्दर कला कृतियों के निर्माण कार्य में कई वर्षों से लगे हैं। ग्रामीणों को प्रशिक्षित करने में लगे यहाँ के 32 वर्षीय दीनबंधु सरदार एवं सरला सरदार (45) बताते हैं कि वे लोग गांव में ही स्थित नदी नालों के आस पास मिलने वाली एक विशेष प्रकार की घास, बेकार पड़े सामानों व धागे की मदद से सुन्दर हस्तशिल्प जैसे कुसन , चटाई , हैंगिंग वाल , मोबाईल कवर , लेडीज पर्श , टेबल कवर , फोल्डर , कलम दान जैसे सौ से अधिक प्रकार की वस्तुएं बनाते हैं। दीनबंधु ने इस मौके पर कला मंदिर और नाबार्ड से मिली मदद के बारे में भी संजय कुमार को विस्तार से बताया। बताया कि अभी उनकी तैयार वस्तुओं को बिष्टूपुर स्थित कला मंदिर के बिक्रय केंद्र से बेचा जाता है। संजय कुमार ने इन कारीगरों से कहा कि वे पूर्व की तरह कला मंदिर के माध्यम से ऑफलाइन बिक्री करते रहें किन्तु सुझाव दिया कि क्यों न इन सुन्दर उत्पादों को ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध करवाया जाये ताकि अमेजॉन , फ्लिपकार्ट , स्नैपडील और ईबे जैसी वेबसाइटों के माध्यम से न केवल उनको वृहत बाजार मिलेगा , बल्कि अच्छे दाम मिलने के साथ साथ झारखण्ड की इस स्थानीय बुनाई कला को वैश्विक पहचान भी मिलेगी। उनके इस प्रस्ताव पर गांव वालों की सहमति के बाद इंटरनेट की जानकारी रखने वाले युवाओं को संजय कुमार ने न केवल इन मार्केटिंग साइट्स पर प्रोफाइल बनाकर इन कलात्मक वस्तुओं को बेचने की प्रक्रिया को समझाया बल्कि ebay पर प्रोफ़ाइल बनाकर कुछ उत्पादों को सूचीबद्ध भी किया। ईबे साइट पर बनाये गए इस प्रोफ़ाइल को गांव के ही एक युवा श्यामल सरदार संचालित करेंगे। अभी हाल अपने उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री इच्छुक कारीगर अपने उत्पाद श्यामल सरदार के मदद से बेच सकेंगे किन्तु धीरे धीरे अन्य लोगों को भी अमेजॉन , स्नैपडील एवं फ्लिपकार्ट पर अपने उत्पाद बेचने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उक्त प्रशिक्षण की जिम्मेदारी जिले की एक गैर सरकारी संस्था “चेंज इंडिया फाउंडेशन ” को दी गयी। इस अवसर पर उन्होंने झारक्राफ्ट के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए ग्रामीणों को बताया कि स्थानीय कला के प्रोमोशन और विपणन सहायतार्थ यह एक सरकारी उपक्रम है किसी भी प्रकार की मदद हेतु झारक्राफ्ट से संपर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर चेंज इंडिया फाउंडेशन के बिश्वजीत प्रसाद , सारथी सरदार , कमला सरदार , संगीता सरदार , जलेश्वरी सरदार , आश्रिता सरदार , कल्पना सरदार ,गुरुमुनि सरदार आदि मौजूद थे।

