जमशेदपुर-आदिवासी समाज संगठित समाज है-  राज्यपाल

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जमशेदपुर। 18 मार्च

जनसंख्या बढ़ने के कारण जंगल सीमित होते जा रहे हैं। सभी को संगठित होकर जल-जंगल-जमीन को बचाने का प्रयत्न करना है। आदिवासी समाज संगठित समाज है। हमारे नृत्य में भी संगठन प्रतिबिम्बित होता है। आदिवासी जंगलों के प्रहरी हैं, वे निरन्तर जंगलो को रक्षा करते हैं और इनका अस्तित्व बनाए रखने का प्रयत्न करते हैं। ये बाते  राज्यपाल श्रीमती द्रोपदी मुर्मू ने कहीं। वे आज एदेलडीह, कोवाली, पूर्वी सिंहभूम जिला में दिशोम बाहा बोंगा महोत्सव को सम्बोधित कर रही थी। इस कार्यक्रम का आयोजन संथाली समुदाय के द्वारा कराया गया।

राज्यपाल ने कहा कि यह हमारे समाज के लिए गर्व का विषय भी है और अनुकरणीय भी है कि आदिवासी समाज बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं करता है। समाज के विकास के लिए शिक्षा बहुत आवश्यक है। आदिवासी समुदाय को शिक्षित कर पूर्ण विकास सम्भव है।

इस अवसर पर सांसद विद्युत वरण महतो, पोटका विधायक श्रीमती मेनका सरदार, पुलिस अधीक्षक श अनूप टी.मैथ्यू तथा अन्य पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आम जन उपस्थित थे।

पूर्वी सिंहभूम जिला भ्रमण के क्रम में मारांग तालसा सुन्दरनगर में भी दो दिवसीय बाहा महोत्सव का शुभारम्भ माननीय राज्यपाल महोदया द्वारा किया गया। इस अवसर पर भी राज्यपाल महोदय ने आदिवासी समुदाय के लिए शिक्षा के महत्व को रेखांकित तथा राज्यपाल महोदया ने भी आदिवासी महिलाओं के साथ झूमर नृत्य में शामिल हो खुशी जाहिर की।

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