
सरायकेला(गम्हरिया)


गम्हरिया के शंकरपुर गांव से प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटा लेने के फरमान का झामुमो विधायकों ने पुरजोर विरोध किया है। कोल्हान के पाँच झामुमो विधायकों ने आयडा एमडी सह जिला उपायुक्त से इस मामले में अनुसूचित क्षेत्र के कानून को पालन करते हुए इस अभियान को स्थगित करने की मांग करते हुए एट्रोसिटी एक्ट के तहत केस करने की चेतावनी दिया है। गम्हरिया में एक प्रेस वार्ता कर विधायक चंपाई सोरेन, दीपक बिरूवा, कुणाल षाड़ंगी व दशरथ गागराई ने कहा कि शंकरपुर, कालिकापुर, बाड़ुबाद, सिदाडीह आदि गाँवों के आयडा द्वारा विस्थापित लोग ही शंकरपुर गाँव में बसे हैं। उन्होंने कहा कि जमीन लेने के बाद आयडा द्वारा उन्हे न तो नौकरी मिली और न ही मुआवजा दिया गया। किन्तु प्रशासन भाजपा सरकार के ईशारे पर उन्हें उजाड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी-मूलवासियों के अधिकार की रक्षा के लिए संविधान में सीएनटी, एसपीटी, समता जजमेट, विल्किनसन रूल, मानकी मुंडा, वन अधिकार अधिनियम, एट्रोसिटी एक्ट लागू किया गया है जहाँ ग्रामसभा का निर्णय ही अंतिम निर्णय है। विधायक चंपाई सेोरेन ने कहा कि आयडा क्षेत्र के 80 प्रतिशत उद्योग मृत और 20 प्रतिशत कोमा में है। आयडा पहले उसे चालू कराए उसके बाद अतिक्रमण हटाने की बात सोचे। उन्होने कहा कि आयडा के पास स्प्ष्ट जानकारी नहीं है कि शंकरपुर से कितने लोग विस्थापित हुए हैं। विधायक दीपक बिरूवा ने कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में बिना ग्रामसभा के कोई निर्णय प्रशासन नहीं ले सकता है। इसमें वे एट्रोसिटी एक्ट के जाल में फंस सकते है। राष्ट्रपति के अधिसूचना के बगैर यहाँ कोई नियम लागू नहीं ोि सकता है। विधायक दशरथ गागराई ने कहा कि झामुमो प्रशासन के तुगलकी फरमान का विरोध करेगी। सरकार का एक हजार दिन की उपलब्धि सिर्फ पोस्टर बैनर पर दिख रहा है। इसमें कितने लोग विस्थापित हुए है और उन्हे क्या मिले यह नहीं बताया गया।

