
नई दिल्ली । विधानसभा का कार्यकाल 29.11.2015 को समाप्त हो रहा है।भारत के संविधान के अनुच्छेद 172(1) और जन प्रतिनिधित्व कानून,1951 की धारा 15 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को बिहार में वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से पहले नर्इ विधानसभा का गठन करना होगा।(1) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रबिहार राज्य में विधानसभा की कुल सीटें और परिसीमन कानून 2002 के अंतर्गत परिसीमन आयोग द्वारा तय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीटें इस प्रकार हैं :-
| राज्य | विधानसभा क्षेत्रों की कुल संख्या | अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित | अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित |
| बिहार | 243 | 38 | 2 |
(2) मतदाता सूची
बिहार में सभी वर्तमान विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में संशोधन किया गया और उसे 01.11.2015 को प्रकाशित किया गया। राज्य में 07.09.2015 को मतदाताओं की संख्या इस प्रकार थी-
| राज्य | मतदाताओं की कुल संख्या |
| बिहार | 66826658 |
(3) फोटो मतदाता सूची
आगामी चुनाव में मतदाता पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका प्रतिशत इस प्रकार है –
| राज्य | फोटो पहचान पत्र का प्रतिशत |
| बिहार | 99.98 |
(4) मतदाता फोटो पहचान पत्र
मतदान के समय मतदान केन्द्र पर मतदाताओं की पहचान अनिवार्य होगी। जिन मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र दे दिए गए हैं, उनकी पहचान इसके जरिए की जाएगी। इस समय राज्य में फोटो पहचान पत्र की कवरेज इस प्रकार है-
| राज्य | फोटो पहचान पत्र का प्रतिशत |
| बिहार | 100 |
शेष मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता पंजीकरण अधिकारियों से तत्काल मतदाता फोटो पहचान पत्र प्राप्त कर लें।
यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी मतदाता मतदान करने के अधिकार से वंचित न रहे। यदि उसका नाम मतदाता सूची में है, तो मतदाताओं की पहचान के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की इजाजत के लिए अलग से निर्देश जारी किये जाएंगे।
(5) मतदान केन्द्र
राज्य के मतदान केन्द्रों की संख्या इस प्रकार है-
| राज्य | मतदान केन्द्रों की संख्या |
| बिहार | 62779 |
ऐसे दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए सभी मतदान केन्द्र भूतल पर बनाए जाएं और रैंप की सुविधा दी जाए। मतदान केन्द्रों पर हेल्पलाइन और सुविधा केन्द्रों के जरिए मतदाता सूची में अपना नाम ढूंढने की सुविधा प्रदान की जाए।
(6) मतदान केन्द्रों पर मूलभूत न्यूनतम सुविधाएं
आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के लिए निर्देश जारी किये हैं कि प्रत्येक मतदान केन्द्र पर मूलभूत न्यूनतम सुविधाएं जैसे-पीने का पानी, शैड, शौचालय, शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए रैंप और एक मानक वोटिंग कंपाटमेंट होना चाहिए।
(7) मतदान दल
विशेष मतदान दल बनाए जाएंगे, जिसके लिए तीन चरणों वाली प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सबसे पहले योग्य अधिकारियों के एक समूह को मतदान डयूटी के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। दूसरे चरण में प्रशिक्षित लोगों में से कुछ का चयन सामान्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति में किया जाएगा। तीसरे स्तर पर मतदान केन्द्र का चयन मतदान दल के रवाना होने से पहले किया जाएगा।
(8) इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन
राज्य में सभी मतदान केन्द्रों पर मतदान कराया जाएगा। आयोग पहले ही पर्याप्त संख्या में ईवीएम उपलब्ध कराने के प्रबंध कर चुका है, ताकि सुगमता के साथ मतदान कराया जा सके। आयोग ने प्रथम स्तर पर ईवीएम के जांच के संबंध में नये निर्देश जारी किये हैं, जो राज्य में मतदान के समय प्रयोग में लाए जाएंगे। प्रथम स्तर पर जांच राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में की जाएगी। ईवीएम के लिए दो चरणों में व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में जिला भंडारण केन्द्र में रखी सभी ईवीएम की जिला निर्वाचन अधिकारी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में जांच करेंगे।
मतदाता प्रमाण योग्य लेखा सत्यापन
इसका इस्तेमाल 34 जिलों में फैले 36 एसी में किया जाएगा।
मत पत्र पर उम्मीदवारों की तस्वीर
मत पत्र पर संबंधित उम्मीदवार के चुनाव चिन्ह के साथ उम्मीदवार की तस्वीर होगी।
नोटा यानी उक्त से कोई नहीं का विकल्प
उच्चतम न्यायालय के 27 सितंबर, 2013 के निर्णय के अनुसार मतदाता पत्र और इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन में नोटा यानी उक्त में से कोई नहीं का विकल्प होना चाहिए। इसके अनुपालन में मशीन में अंतिम उम्मीदवार के नाम के नीचे नोटा का बटन उपलब्ध कराया जाता है।
मतदाता का हलफनामा
आयोग ने निर्देश जारी किये हैं कि नामांकन पत्र के साथ भरे जाने वाले हलफनामे में उम्मीदवारों के लिए सभी कॉलमों को भरना जरूरी है। यदि कोई कॉलम खाली छूट गया है तो निर्वाचन अधिकारी उम्मीदवार को नोटिस जारी करके उससे सभी कॉलमों को भरकर हलफनामा दायर करने को कहेगा। इस नोटिस के बाद यदि कोई उम्मीदवार अधूरा हलफनामा दायर करता है, तो उसका नामांकन पत्र जांच के समय रद्द किया जा सकता है।
आदर्श आचार संहिता
राज्य में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आदर्श आचार संहिता के सभी प्रावधान समूचे बिहार राज्य में और सभी उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों, राज्य सरकार पर लागू होंगे।
आयोग ने आदर्श आचार संहिता के दिशा-निर्देशों को प्रभावकारी तरीके से लागू करने के लिए व्यापक प्रबंध किये हैं। इनका उल्लंघन करने वालों से कड़ी से निपटा जाएगा।
शिकायत निवारण तंत्र
बिहार में वेबसाइट और कॉल सेंटर पर आधारित एक शिकायत निवारण तंत्र होगा। कॉल सेंटरों की संख्या 1950 है, जिसका एक टॉल फ्री नम्बर होगा। राज्य के लिए शिकायत पंजीकरण वेबसाइट के यूआरएल की घोषणा मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा अलग से की जाएगी। शिकायतें टॉल फ्री कॉल सेंटर नम्बर अथवा वेबसाइट पर टेलीफोन से दर्ज कराई जा सकती हैं। शिकायतों पर एक समय सीमा के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव कार्यक्रम
आयोग ने मौसम, शिक्षा सत्र, त्योहारों, राज्य में कानून व्यवस्था की वर्तमान स्थिति, केन्द्रीय पुलिस बल की उपलब्धता और समय पर बल की तैनाती तथा अन्य जमीनी हकीकतों का जायजा लेने के बाद विधानसभा चुनाव कराने के लिए एक कार्यक्रम तैयार किया है।
नोट- बिहार विधानसभा का चुनाव कार्यक्रम देखने के लिए अनुलग्न-I देखने के लिए यहां क्लिक करें –

