
जमशेदपुरः देहाती भाषा में एक प्रसिद्ध कहावत है- दिन भर चिल्लैलीं बच्चा न बियेलीं. गुरुवार को आदित्यपुर दो कॉलोनी के रोड 13-14 में हाई कोर्ट के निर्देश पर अतिक्रमण हटाने गये पुलिस बल, आवास बोर्ड व जिला प्रशासन पर चरितार्थ हो गयी. जी हां, तीन दिनों तक चले हाई वोल्टेज ड्रामा के बाद पुलिस गुरुवार को पुलिस बल पूरे लाव लश्कर के साथ लौट गयी. इस तरह अतिक्रमण हटाओ अभियान फ्लाप कर गया.


गौरतलब है कि आवास बोर्ड ने विगत 2011 में रोड नंबर 13-14 के रिक्त पड़े भूखंड को लॉटरी के आधार पर बेचा था,लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के बाद आबंटियों को पोजिशन नहीं दिलाया जा सका. इससे क्षुब्ध आबंटी हाई कोर्ट चले गये, जिसके बाद फैसला उनके पक्ष में आया और हाई कोर्ट ने आवास बोर्ड को निर्देश दिया कि आबंटियों को तत्काल पोजिशन दिलाया जाये, जिसके बाद आवास बोर्ड ने कई बार प्रयास किया, लेकिन मामला ढाक के तीन पात ही साबित हुआ. स्थानीय लोग उक्त खाली पड़े भूखंड को मैदान बता कर उसके आबंटन का लगातार विरोध कर रहे हैं. इस बार पुनः सरायकेला खरसावां जिला प्रशासन ने आवास बोर्ड को फोर्स व मजिस्ट्रेट उपलब्ध कराया. साथ ही तीन दिनों तक इस अभियान को चलाने की अनुमति दी. इसके तहत विगत मंगलवार से अभियान शुरु हुआ, जैसे ही स्थानीय लोगों को पता चला, तो वे लोग विरोध कर दिये. बावजूद इसके आवास बोर्ड के अभियंता व कर्मचारियों ने सीमांकन कर दिया,लेकिन पोजिशन नहीं दिला सके. दूसरे दिन भी पुलिस बल व आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता अतिक्रमण स्थल पर पहुंचे, जबकि कार्यपालक दंडाधिकारी सह सीओ गम्हरिया जीतेंद्र मुंडा आरआईटी थाने पर जमे रहे. घटना स्थल पर नहीं पहुंचे, जिसके बाद दूसरे दिन का अभियान फ्लाप रहा. तीसरा व अंतिम दिन पुनः दंडाधिकारी किसी अन्य काम में व्यस्त होने के कारण विलंब से पहुंचे, जिस पर पोजिशन लेनेवाले आबंटियों ने पोजिशन लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि शाम हो गयी है व साथ ही विरोध हो रहा है, इसलिए वे पोजिशन नहीं लेंगे. इसके बाद प्रशासन लौट गया.
उधर दिन भर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष बाल बच्चे समेत तथा स्थानीय युवा मैदान में जमे रहे व धरना देते रहे. दिन भर भाषणबाजी होती रही. आम आदमी पार्टी के नेता प्रेम कुमार भी दिन भर जमे रहे और कहते रहे कि पोजिशन लेने नहीं दिया जायेगा. यह मैदान है और मैदान ही रहेगा. इस दौरान दिन भर मीडियाकर्मियों ने भी डेरा डाले रखा. इस तरह प्रशासन का यह प्रयास भी अन्य प्रयासों की तरह विफल रहा. स्थानीय लोगों का साफ कहना था कि यह मैदान है व आवास बोर्ड के नक्शे में भी इसका जिक्र है,लेकिन बावजूद इसके आवास बोर्ड ने इसे बेच दिया है, जिसे वे किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे. उधर आवास बोर्ड का कहना था कि प्रशासन को जितना सख्त रवैया अपनाना चाहिए था नहीं अपनाया. बावजूद उनका प्रयास जारी रहेगा. उधर धरना प्रदर्शन का प्रशासन द्वारा तसवीरें भी ली गयी हैं, जिन्हें हाई कोर्ट में सुपुर्द किया जायेगा.

