
जमशेदपुर ।
लौहनगरी में शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी मंदिर, मानगो सहारा सिटी सहित अन्य इलाकों में मिथिला का प्रसिद्ध त्योहार सामा-चकेवा मनाया गया। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।1 परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति महिला मंडल की अध्यक्ष वैदेही मिश्र के नेतृत्व में शाम को बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर में एकत्रित हुईं। विधि-विधान से पूजा-पाठ के बाद चूड़ा-दही खिलाकर मिट्टी से बनी सामा-चकेवा और चुगला-चुगली और पक्षियों का विसर्जन किया। महिलाएं बांस की बनी टोकरियों में सामा-चकेवा, पक्षियों और चुगला-चुगली की मूर्तियां लेकर पहुंची थीं। 1देर शाम तक लोक गीतों का सिलसिला भी चला। समदान गीत के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। बताते हैं कि सामा-चकेवा की कहानी का वर्णन पुराणों में भी मिलता है।जमशेदपुर : लौहनगरी में शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी मंदिर, मानगो सहारा सिटी सहित अन्य इलाकों में मिथिला का प्रसिद्ध त्योहार सामा-चकेवा मनाया गया। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।1 परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति महिला मंडल की अध्यक्ष वैदेही मिश्र के नेतृत्व में शाम को बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर में एकत्रित हुईं। विधि-विधान से पूजा-पाठ के बाद चूड़ा-दही खिलाकर मिट्टी से बनी सामा-चकेवा और चुगला-चुगली और पक्षियों का विसर्जन किया। महिलाएं बांस की बनी टोकरियों में सामा-चकेवा, पक्षियों और चुगला-चुगली की मूर्तियां लेकर पहुंची थीं। 1देर शाम तक लोक गीतों का सिलसिला भी चला। समदान गीत के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। बताते हैं कि सामा-चकेवा की कहानी का वर्णन पुराणों में भी मिलता है।



