
कृष्णेंदु घोष, बहरागोड़ा: बंगला श्रावण की तीसरी एवं हिंदी श्रावण की पहली सोमवारी पर झारखण्ड के प्राचीन शिव मंदिरों में एक चित्रेश्वर शिव मंदिर में आज जलाभिशेख करने के लिए श्रधालुओं की भीड़ उमड़ी. चित्रेश्वर शिव मंदिर के इतिहास अत्यंत पुराना हैं. यह मंदिर तीन हज़ार वर्ष पुराना है, स्कन्ध पुराण में इसका उल्लेख है. हैदराबाद के उस्मानिया विश्व विद्यालय में इसका दस्तावेज़ सुरक्षित है. धालभूम राजाओं ने इस मंदिर का जीर्णोधार कराए थे. झारखण्ड-प.बंगाल सीमा पर स्थित बहरागोड़ा सदर से करीब 12 किलोमीटर दूर यह मंदिर स्थित है. इस मंदिर के शिव लिंग में विभाजन है. दन्त कथाओं के अनुसार दो राजाओं के बीच मंदिर को लेकर हुए विवाद के कारण यह विभाजन अलौकिक रूप से हुआ था. हर वर्ष सावन महिना में जलाभिशेख के लिए झारखण्ड,प.बंगाल एवं ओडिशा के भक्तों का समागम होता है. आज सीमावर्ती प.बंगाल के भाथहन्डिया गाँव के युवा समाजसेवी सांटू पात्रो के सौजन्न से कावरियों एवं भक्तों के लिए शिविर लगाया गया, जिसमे प्राथमिक चिकित्सा एवं जलपान का प्रबंध किए गए थे. इस अवसर पर पूर्व मुखिया चित्तरंजन देहरी, बाबला बारीक़ सहित अनेक लोग उपस्थित थे. बहरागोड़ा छेत्र के बलियाबाबा शिव मंदिर, मतिहना शिव मंदिर, महूलडांगरी के कामेश्वर शिव मंदिर, बहरागोड़ा के पटेश्वर शिव मंदिर, उइनाला शिव मंदिर सहित सभी शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी. कल मध्य रात्रि के बाद से ही भक्तों का तांता चित्रेश्वर शिव मंदिर में कतारबद्ध होने के लिए लग गया था.



