
जमशेदपुर, ।
टाटा मेन हॉस्पीटल के मनोरोग विभाग ने टीएमएच ऑडिटोरियम में आज कक्षा 11 के विद्यार्थियों के लिए कार्यशाला ‘टीन बडी’ का आयोजन किया। डॉ. डी पी समाद्दार, चीफ मेडिकल इंडोर सर्विसेज ने मुख्य अतिथि और प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा जागरुकता के प्रसार के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया। टाटा स्टील के कॉर्पोरेट सर्विसेज वी पी सुनील भास्करन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थी।
श्री भास्करन ने टीएमएच के मनोरोग विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि हर बच्चे में सफल होने की संभावना है और हर बच्चे में आईआईटी व आईआईएम में जाने की क्षमता होती है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभवों को साझा किया। कार्यशाला में डीएवी पब्लिक स्कूल के 120 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर श्रीमती प्रज्ञा सिंह, प्रिंसिपल, डीएवी पब्लिक स्कल, बिष्टूपुर और टीएमएच के वरीय चिकित्सक भी उपस्थित थे।
डाॅ. अग्रवाल ने किशोर अवस्था में किशोर-किशोरियों को होने वाली परेशानियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आमतौर पर इस अवधि के दौरान बच्चों पर शिक्षा का दबाव, पियर ग्रुप में स्वीकार्यता, स्व-छवि, स्वाभिमान और अभिभावकों के साथ संबंध प्रमुख मुद्दे होते हैं। उन्होंने ऐसी स्थितियों से निपटने के बारे में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस उम्र में स्वाभिमान और शारीरिक छवि महत्वपूर्ण होती है। दूसरे आपको स्वीकार करें, इससे पहले बिना किसी शर्त आपको स्वयं को स्वीकार करना होगा। जीवन में असफलता एक अन्य बड़ा मुद्दा है। डाॅ. अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि असफलता एक अस्थायी नुकसान या निराशा होती है। यह कोई विपदा या आपदा नहीं होती। हम लोगों को उनके व्यवहार से समझने का प्रयास करते हैं, लेकिन कभी-कभी बुरी नीयत वाले लोगों का व्यवहार अच्छा हो सकता है। अभिभावक और बच्चों की बीच मतभेद में बच्चे को याद रखना चाहिए कि उनके प्रति अभिभावक की नीयत कभी खराब नहीं होती, लेकिन अप्रोच या व्यवहार एक मुद्दा हो सकता है। कोई अभिभावक अधिक दंड देने पर विश्वास करते हैं, जबकि कुछ सहयोगात्मक अप्रोच का इस्तेमाल करते हैं।
गौरतलब है कि कार्यशाला का उद्देश्य किशोर-किशोरियों को तनाव से अधिक प्रभावशाली तरीके से निपटने और तनावपूर्ण परिस्थितियों के साथ जुड़ी कई विशेष समस्याओं के समाधान में सहयोग प्रदान करना था।

