
कौशिक घोष चौधरी
जमशेदपुऱ।
सूर्यषष्ठी पर्व के दूसरे दिन बुधवार को महिलाओं ने दिनभर उपवास रखा और देर शाम खीर – रोटी व केले का भोग ग्रहण किया। इसके बाद पुन: निर्जला व्रत शुरू कर दिया। गुरुवार की शाम को छठ घाटों पर औरतें डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी, फिर शुक्रवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ेंगी। वहीं, व्रत के लिए घाटों पर श्रद्धालु वेदी बनाने, सजाने और घर में पूजन सामानों को जुटाने में जुटे रहे। उधर, नगर प्रशासन भी साफ-सफाई की व्यवस्था में लगा रहा। छठ पूजा की शुरूआत वैसे तो मंगलवार नहाय खाय के साथ शुरू हो गई थी। बुधवार को खरना था। इस अवसर पर महिलाओं ने दिनभर निर्जल व्रत रखा शाम को मीठा भोजन किया। बृहस्पतिवार को डूबते सूर्य (अस्ताचलगामी सूर्य ) और शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।


आज का सूर्यास्त का समय : शाम 5:11 मिनट
छठ में आखिर क्यों दिया जाता है डूबते सूरज को अर्घ्य?
उगते सूर्य को अर्घ्य देने की रीति तो कई व्रतों और त्योहारों में है लेकिन डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा आमतौर पर केवल छठ व्रत में है I कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ढलते सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है I आइए जानते हैं….सुबह, दोपहर और शाम तीन समय सूर्य देव विशेष रूप से प्रभावी होते हैं.
सुबह के वक्त सूर्य की आराधना से सेहत बेहतर होती है. दोपहर में सूर्य की आराधना से नाम और यश बढ़ता है. शाम के समय सूर्य की आराधना से जीवन में संपन्नता आती है Iशाम के समय सूर्य अपनी दूसरी पत्नी प्रत्यूषा के साथ रहते हैं I इसलिए प्रत्यूषा को अर्घ्य देना तुरंत लाभ देता है Iजो डूबते सूर्य की उपासना करते हैं ,वो उगते सूर्य की उपासना भी ज़रूर करेंज्योतिष के जानकारों की मानें तो अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा इंसानी जिंदगी हर तरह की परेशानी दूर करने की शक्ति रखती है फिर समस्या सेहत से जुड़ी हो या निजी जिंदगी से. ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर कई मुसीबतों से छुटकारा पाया जा सकता है I

