
जमशेदपुर। आनन्दमार्ग प्रचारक संघ सेवा धर्म मिषन का पाँच दिवसीय उपयोगिता प्रषिक्षण शिविर 19 दिसम्बर 2015 को सम्पन्न हुआ। यह शिविर 15 दिसम्बर को आनन्द मार्ग आश्रम गदड़ा में षुरू हुआ था। शिविर के विभिन्न कार्यक्रम टेल्को गुरूद्वारा, टेल्को स्टेडियम, टेल्को आॅफिसर्स क्लब, मानगो विजय ग्रीन अर्थ सामुदायिक भवन, साकची कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के बीच एवं आदित्यपुर माझीटोला रैनबसेरा में लोगों के बीच योग एवं आध्यात्मिक साधना सम्बन्धित कार्यक्रम किया गया। यह षिविर 15 दिसम्बर से 19 दिसम्बर तक विभिन्न स्थानों में आयोजित किया गया। आचार्य पूर्णदेवानन्द अवधूत ने कहा कि जीवात्मा के परमात्मा के साथ एकाकार होने का नाम ही योग है। जिस तरह पानी और चीनी को मिलाने से एकाकार हो जाता है यानि मिलने के बाद चीनी और पानी को अलग अस्तित्व नहीं रहता उसी तरह अध्यात्मिक साधना के माध्यम से जब साधक परमात्मा के साथ मिलकर एक हो जाता है तो उस समय मैं तथा परमात्मा का बोध का अस्तित्व नहीं रहता। आनन्दमार्ग के योग साधना में जीवात्मा को परमात्मा के साथ मिलाने की जो अध्यात्मिक साधना की प्रक्रिया है वही योग है। आसन करने से षरीर और मन स्वस्थ्य रहता है। यह ग्रन्थि दोश को दूर करता है। आसन करने से मन अप्रिय चिन्ता से दूर होता है। यह सूक्ष्म और उच्चकोटि के साधना में काफी मददगार साबित होता है। नियमित आसन करने से षरीर में लचीलापन आता है। योग करने से षरीर और मन का संतुलन बना रहता है। प्राणायाम एक ष्वांस की प्रक्रिया है जो ष्वांस नियंत्रण के साथ ईष्वरीय भाव आरोपित करता है। इस पाँच दिवसीय उपयोगिता प्रषिक्षण षिविर कार्यक्रम में आचार्य विष्वस्वरूपानंद अवधूत, आचार्य महीतोशानंद अवधूत, आचार्य नित्यज्ञानानंद अवधूत, लालबिहारी आनंद, धर्मेन्द्र जी, योगेष जी, अरूण जी, पी0एन0 राय, आषा दीदी, मदन जी, सुनील आनंद तथा अन्य लोगों ने भी सहयोग किया।



