
जमशेदपुर।
भारत और दुनिया भर की जनजातीयता का जश्न मनाने वाला टाटा स्टील का वार्षिक आउटरीच कार्यक्रम ‘संवाद’ के पांचवें संस्करण का आज ‘जावा’ के अनावरण और 101 नगाड़ों की धुन के साथ जमशेदपुर के गोपाल मैदान में रंगारंग आगाज किया गया।
उद्घाटन समारोह जनजातीय नायक बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि के साथ शुरू हुआ। बैजू मुर्मू, दिगंबर हांसदा और पद्म श्री पैट्रीसिया मुखीम, श्री आर बालासुब्रमण्यम समेत सामाजिक विकास के क्षितिज के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्व इस अवसर पर मौजूद थे। टाटा स्टील के वरीय लीडरशिप के अलावा श्री संजीव पॉल, वीपी, सेफ्टी, सेक्युरिटी, हेल्थ ऐंड सस्टेनेबिलिटी, टाटा स्टील तथा डॉ. पेट्रस ब्लौहॉफ, इंडीपेंडेंट डायरेक्टर, टाटा स्टील आदि ने भी समारोह में शिरकत की।
टाटा स्टील के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी द्वारा निर्मित एक अद्वितीय और शक्तिशाली मंच ‘संवाद’ एक छत के नीचे भारत में जनजातीयवाद पर वार्तालाप शुरू करने के लिए आदिवासी समुदायों के नेतृत्वकर्ताओं और सदस्यों को एक साथ लाता है। अगले चार दिनों के दौरान भारत के 25 राज्यों और अन्य 11 देशों से 137 जनजातियों और उप-जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 1700 से अधिक प्रतिभागी सामाजिक परिवर्तन हेतु भारत व इसके बाहर विकास की चुनौतियों पर सम्मेलन के थीम ‘कमिंग टूगेदर फॉर सोशल चेंज’ के इर्द-गिर्द अपनी सोच, अपने विचार और दृष्टिकोण साझा करेंगे।
इस कार्यक्रम में आदिवासी समुदायों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान विभिन्न तरीकों से होगा। ये मुख्य रूप से ’जनजातीय संस्कृति और पहचान’, ’जनजातीय समुदायों के लिए भूमि और वन अधिकार’, ‘शासन और विकास पर जनजातीय दृष्टिकोण’, ’शांति निर्माण और संघर्ष समाधान’ पर केंद्रित होंगे। आज उद्घाटन के बाद अगले चार दिनों के तक ट्राइबल कल्चर सेंटर (टीसीसी) में सुबह और दिन में विचार-विमर्श का दौर चलेगा।
इस ‘संवाद’ में हिस्सा लेने के लिए नागालैंड, छत्तीसगढ़, मणिपुर, मेघालय, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, त्रिपुरा, कर्नाटक, केरल, असम, सिक्किम, महाराष्ट्र, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों से प्रतिभागी आए हैं।
पांच दिवसीय आयोजन के दौरान, विभिन्न जनजातीय समुदायों के लगभग 230 प्रतिभागी जनजातीय चिकित्सा कार्यशाला, जनजातीय कला और शिल्प, जनजातीय औषधीय हाट, आतिथ्य (संवाद-ताज सहयोग) आदि के साथ अपनी हस्तशिल्प कला का प्रदर्शन करेंगे, पारंपरिक चिकित्सा तकनीकों पर स्टालों लगाएंगे और अपने अद्वितीय जनजाति-विशिष्ट व्यंजन तैयार करेंगे। इसके अलावा, 33 अंतरराष्ट्रीय अतिथि भी इस मेगा इवेंट में शामिल होंगे। 400 से अधिक प्रतिभागी विभिन्न पारंपरिक सांस्कृतिक मंडलियों का हिस्सा होंगे, जो पांच दिनों तक हर शाम गोपाल मैदान में अपनी विरासत को प्रदर्शित करेंगे। समारोह में आगंतुक लजीज पारंपरिक जनजातीय व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे, जो मुख्यतः जैविक प्रकृति के होंगे।
उद्घाटन की शाम ‘बस्तर बैंड’ के प्रदर्शन के साथ जीवंत हो उठी। बैंड ने मध्य भारत से जनजातियों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन करते हुए स्वदेशी संगीत प्रस्तुत किया। पश्चिम बंगाल के खड़िया जनजाति द्वारा कर्म नृत्य प्रस्तुत किया गया।
टाटा स्टील के चीफ, सीएसआर श्री सौरव रॉय ने कहा, “अपने पांचवें वर्ष में ‘संवाद’ आदिवासी संस्कृति का जश्न मनाने और विकास पर वैकल्पिक परिप्रेक्ष्य का अन्वेषण करने के लिए तैयार है। कार्यक्रम के दौरान सुबह सामूहिक कृत्यों की कुछ अविश्वसनीय कहानियों को साझा किया जायेगा, तो शाम में आदिवासी संगीत, कला, शिल्प, व्यंजन और उपचार प्रथाओं का एक तरह का उत्सव होगा। जनजातीय समुदायों का हम पर जारी विश्वास निरंतर हमारी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है, और मुझे उम्मीद है कि उन सभी का स्वागत करने में पूरा जमशेदपुर हमसे जुड़ेगा।“


संवाद के दूसरे दिन की प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं –
16 वंबर, 2018
ऽ प्रतिबिंबः मंथन
ऽ पारंपरिक प्रार्थना समारोह
ऽ दिन के लिए थीम
ऽ कहानियां और अनुभव
ऽ एक साझा परिप्रेक्ष्य को पोषण
ऽ जनजातीय चिकित्सकों के अनुभव
जमशेदपुर में आज के मुख्य कार्यक्रम से पहले इस वर्ष की शुरुआत में ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, नागालैंड, छत्तीसगढ़ और झारखंड में संवाद के क्षेत्रीय संस्करणों का आयोजन किया जा चुका है, जिसमें भारत के 19 राज्यों से आदिवासी समुदाय के 720 सदस्यों हिस्सा लिया था।

