जनता के विश्वास पर खङे उतरे एसएसपी अमोल होमकर

 

अमीत मिश्रा,जमशेदपुर,21 अप्रैल

इनदिनो जमशेदपुर के चौक चौराहो व चाय की दुकानो पर दो बातो पर चर्चा हो रही है पहला जमशेदपुर लोकसभा सीट पर कौन होगा सिकदंर .और दुसरा चुनाव के पुर्व संध्या पर अपराघी माया भगत का पुलिस मुठभेङ में मार गिराया जाना ।

विगत 6 माह से शहर में लगातार अपराघिक घटनाओ मे वृद्धि  से यहां के लोगो में एक डर समा गय़ा था लोकिन  लोकसभा चुनाव  के ठीक एक दिन पुर्व  जमशेदपुर  को अशांत करनेवाला  अपरघी माया भगत उर्फ लुल्हा  के पुलिस मुठभेङ में मारे जाने के बाद  न सिर्फ आम जनता में  बल्कि व्यापारी  वर्ग में भी खुशी का माहौल है। कहते है कि  अगर साल का पहला दिन अच्छा बीते  तो पूरे सालभर  कुछ वैसा ही माहौल रहता है  मगर वर्ष  2014  के पहले ही  दिन जब पुरे देश नय़े साल का आगाज जश्न के साथ कर रहा था तो जमशेदपुर गोलियो की थर्राहट से गुंज रहा था एक दिन मे दो लोगो  की गोली  मारकर  हत्या  व  जो जगहो पर फांयरिंग व लुट ने पुरे जिलो को झकझोऱ दिया था और यह सिलसिला लगातार जारी रहा ।इन कांडो में सीवान के बहुचर्चित अपराधी माया भगत उर्फ लुल्हा की संलिल्पता सामने आई लेकिन  वो इतना शातिर था कि इतने सारे घटनाओ को अंजाम  देकर  भी  पुलिस  को चकमा देने में संपन था.इधर बढी हुई अपराघियो को व्यापारी वर्ग व जनता  के निशाने पर कर  दिया है नेताओ ने भी इस अवसर का जमकर  फायदा  उठाया  पानी पी पी कर एसएसपी को कोसा।इसी बीच टाटा मोर्टस  को दो अधिकारीयों को  भी अपराघियो को निशाना बना दिया ।इधर लोकसभा  चुनाव का बिगुल भी फुंका जा चुका था। अब जमशेदपुर पुलिस के सामने दो  बङी चुनौतियो भी  पहला  चुनाव  शांतिपूर्ण संपन कराना  दुसरा शहर  की बिगङी  विधी को पटरी पर लाना।तारीफ करनी पङेगी एसएसपी अमोल होमकर के धैर्य की उन्होने  न सिर्फ चुनाव शांतिपूर्ण संपन कराया बल्कि अपराधी  लुल्हा  के आंतक से  मुक्त कराया  ।स्वभाव से सरफिरा  लुल्हा  मामुली बातो पर लोगो  की जान लेलेता था और शातिर इतऩा था कि पुलिस के चक्रव्युह को आसानी से भेद लेता था। लेकिन  कहते है न अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो  वो  कानुन के हाथो से बच नही सकता.

लोकसभा चुनाव के ठीक एक रात पुर्व जब सारा शहर चैन की नींद सो रहा था  शहर के एसएसपी  की टीम कुख्यात अपराधी लुल्हा से मुठभेङ कर रही थी आखिरकार उस मौत के सौदागार का अंत हो गया ।और दुसर दिन जब सुबह जब अखबारो में यह खबर छपी तो वही लोग जो कुछ दिन पुर्व तक अमोल होमकर की काबलियत पर प्रशनचिन्ह लगा रहे थे  वे आज उनकी धैर्य और पराक्रम की प्रशंसा करते नही  थक रहे है चाहे व्यपारी संगठन से जुङें लोग  हो या चौक चौराहो पर चर्चा का  हिस्सा  बननेवाले  आमलोग की जुबान पर बस एक बात थी कि कसौटी पर खंङे उतरे अमोल होमकर

इस विषय पर जब हमने जिले के एसएसपी अमोल होमकर से बात कि तो उन्होने कहा कि अपराधी कितना भी शातिर क्ये न हो एक न एक दिन  वो पुलिस की गिरफ्त में जरुर आता है हम लगातार लुल्हा के पीछे  लगे हुए थे और आखिरकार लुल्हा को अपने कर्मो की सजा मिल गई।

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