सुपौल–बाढ़ व आपदा की किसी भी स्थिति से निबटने के लिए भले ही राज्य सरकार गंभीर

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sonu kumar bhagat (1)

सोनु कुमार भगत

सुपौल।

बाढ़ व आपदा की किसी भी स्थिति से निबटने के लिए भले ही राज्य सरकार गंभीर है. लेकिन इस दिशा मे प्रशासन गंभीर नही हो पा रही है. बाढ से प्रभावित आबादी के बीच राहत व बचाव कार्य के लिए प्रशासनिक स्तर से अब तक किसी प्रकार की तैयारी नही की गई है. हालात यह है कि आपातकाल से निपटने के लिए यहां एक भी सरकारी नाव उपलब्ध नही कराया गया है और ना ही निजी नावों की ही व्यवस्था हो पायी है.

तैयारी के बावत जब अंचलाधिकारी छातापुर से पुछा गया तो उन्होने बताया कि एक निजी नाव के मालिक की खोज हुई है. जिनसे किराये पर नाव लेने की बातचीत चल रही है. जहां तक राहत व बचाव कार्य की बात है इस संदर्भ मे वरीय अधिकारियों से फिलहाल कुछ भी निर्देश प्राप्त नही हुआ है. राहत व बचाव कार्य की तैयारी के संदर्भ मे जब बीडीओ छातापुर से जानकारी ली गई तो उन्होने कहा कि उनके पास किसी भी  प्रकार के कोई राशि का आवंटन प्राप्त नही है और ना ही उनके पास पूर्व से ही राशि उपलब्ध है.

वे सिर्फ हालात की जानकारी जिला प्रशासन को भेजते है.अब सवाल यह है कि प्रखंड के 23 पंचायतों में ठुंठी, मधुबनी, भीमपुर, जीवछपुर, माधोपुर, झखाड़गढ, चुन्नी, लालगंज, महम्मदगंज व राजेश्वरी पश्चिम के कई गांव बाढ़ की चपेट मे है. सुरसर व गैड़ा नदी का पानी फैलने से कई गांवों में स्थिति यह है कि पानी की तेज धारा में संपर्क पथ बह जाने से  वहां के लोग टापुनूमा जीवन गुजारने को विवश है. लोगो ने गांव छोड़ कर बाहर सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करना भी शुरू कर दिया है. सैकड़ो एकड़ मे लगे धान के फसल व बिचरा पानी मे डुब कर बर्बाद हो गया. बच्चों का स्कूल जाना तो दूर अपने घरों से भी नही निकल पा रहा है. कोशी नदी के स्वरूप वाली सुरसर नदी की बलखाती धारा ने लोगों के सैकड़ो एकड़ जमीन को अपने आगोश मे लिया है.

      बाढ़ से प्रभावित ईलाकों मे खास कर मवेशी पालकों के समक्ष भीषण समस्या खड़ी हो गई है.मवेशियो को पानी से निकालकर उंचे स्थानो पर तो बसेरा बना दिया गया. लेकिन चारा

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