जमशेदपुर-सुखदेव, प्रदीप ,सूबोध दिखे एक मंच पर

रवि कुमार झा

कॉग्रेसियो मे चर्चा का विषय

जमशेदपुर।

जिला मे 156 बस्तियो को मालिकाना हक दिलाने की मांग को लेकर 24 सितबंर को   उपायूक्त कार्यलय में प्रर्दशन के दौरान कॉग्रेस पार्टी के वरीय नेताओ के एक मंच दिखने का मामला राजनितीक गलियारो मे चर्चा का विषय बना हुआ है। हालाकि पार्टी के वरीय  केन्द्रीय नेताओ के आगमन मे तो सभी नेता एक मंच पर दिख जाते तो थे। लेकिन  जिले के स्तर कार्यक्रम में ऐसा पहली बार दिखा कि झाऱखंड के सारे नेता एक मंच पर देखे गए।

झारखंड के पार्टी के प्रदेश  अध्यक्ष सुखदेव भगत ,पूर्व सासंद सुबोध कांत सहाय और  राज्यसभा सासंद प्रदीप बालमुचू तीनो नेताओ को जिला स्तर के कार्यक्रम मे लोगो ने  कभी भी एक मंच पर नही देखे गए है । सुखदेव भगत के द्नारा प्रदेश अध्यक्ष की  कुरसी संभालने के बाद से ही तीनो नेताओ दुरिया और बढ़ गई।  किसी न किसी बहाने एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगते रहे । जिसकी चर्चा भी स्थानिय अखबारो मे भी होती रहती थी। इस दौरान गलत बयान बाजी के कारण राज्य सभा सासंद  प्रदीप बालमुचू के गुट के कार्यकर्ताओ पर कार्यवाई भी हुई। अभी हाल ही पार्टी के अंदरउनी स्थिती को देखते हुए पार्टी के वरीय एक कार्यक्रता ने तो इस्तीफा तक देकर विरोध भी दर्ज करा  दिया।

पुराने कॉग्रेसी को लाने के लिए बनाय़ा गया था एक मंच

वही कुछ माह पूर्व पार्टी मे कुछ पुराने  कॉग्रेसियो को संगठन मे जगह नही मिलने से  एक मंच की भी स्थापना  की थी। जिसमे कोल्हान प्रमंडल के तीनो जिलो के  जमशेदपुर ,सरायकेला- खरंसावा औऱ चाईबासा के अध्यक्षो को हटाने के लिए अंदोलन भी हुआ। यह  अंदोलन तीनो जिलो मे सिलसिलेवार  किया गया। इसमे खुद राज्य सभा सासंद बालमुचू भी शामील हुए। उन्होने इन लोगो के अंदोलन को समर्थन करने की घोषणा भी की। उन्होने कहा कि इस सर्दभ मे पार्टी के सुप्रीमो को शिकायत करने की बात भी कही थी।यही नही सुबोधकांत सहाय के समर्थको को भी संगठन मे जगह नही मिलने  वे भी प्रदेश अध्यक्ष से नाराज चल रहे थे।

पार्टी के अंदर भी चर्चा का विषय

एक दुसरे के खिलाफ बयान देने वाले सारे कॉग्रेसी नेता  एक मंच पर आ जाना  पार्टी के अंदर इस बात की काफी चर्चा विषय बना हुआ है। हालाकि पार्टी के लिए सारे वरीय नेताओ का एकमंच पर आना अच्छा संकेत है लेकिन कार्यकर्ता उहापोह की स्थिती मे है। वे समझ नही पा रहे है कि  इस घड़ी मे क्या करे। क्योकि वे अपने नेता के समर्थन मे एक दुसरे से दुश्मनी ले कर बैठे थे। वे चाह कर भी कुछ बोलने मे असर्मथ दिख रहे है।

 

 

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