
# विजय सिंह
पिछले कुछ दिनों से समाजवादी पार्टी में चल रहे उठापठक की परिणति स्वरुप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव अब समाजवादी पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किये गए हैं.अखिलेश यादव को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष वर्ष २०१७ के आगाज के साथ ही लखनऊ के जनेश्वर पार्क में आपातकालीन राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान रामगोपाल यादव ने की. मुलायम सिंह यादव को नयी समिति का संरक्षक नियुक्त किया गया हैं.हालाँकि मुलायम सिंह यादव ने इस अधिवेशन को असंवैधानिक करार दिया हैं और पलटवार करते हुए रामगोपाल यादव को पुनः पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया है. तमाम नए ब्रांड की कीमती कारों और एस यू वी के बीच तेजी से बदलते परिवेश में साइकिल की सवारी कौन करेगा,इसके लिए दोनों ही पक्ष अब चुनाव आयोग और न्यायालाय का रुख करने की तैयारी में है.
कहते हैं कि जब बाप का जूता बेटे के पैर में आ जाये ,तो बाप को गंभीरता व समझदारी से आचरण करना चाहिए..मुलायम सिंह यादव यहीं चूक कर गए.अखिलेश यादव को वो अभी तक सिर्फ अपना पुत्र ही मानते रहे ,यह भूल गए कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के वह मुख्यमंत्री भी हैं. सत्ता के शिखर पर जाने के पहले व्यक्ति चाहे जैसा हो,एक बार सत्ता शीर्ष पर आसीन होने के बाद उसे सत्ता और अस्तित्व को बचाने के लिए जो भी करना पड़े ,वो पीछे नहीं हटता.राजनीति में तो हर कोई यही करता नजर आ रहा है..
हाँ ,इतिहास अपने को दुहराता हैं,यह भी कई बार सच प्रतीत होता रहा है..याद कीजिये,६० के दशक की.लोग बताते हैं कि कुश्ती के अखाड़े में कोई भी गर्वीले तरुण मुलायम सिंह को देखकर प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था. प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के विधायक नत्थू सिंह भी युवा मुलायम सिंह यादव से प्रभावित हुए और उन्होंने मुलायम सिंह को राम मनोहर लोहिया से संपर्क करवाया. कूटनीतिज्ञ कहते हैं कि राजनीति में अगर तरक्की करनी हैं तो जिस सीढ़ी से ऊपर चढ़ो, उस सीढ़ी को ही हटा देना चाहिए. मुलायम सिंह ने उन पांच वर्षों के दौरान राम मनोहर लोहिया और राजनारायण से धीरे धीरे सम्बन्ध बढ़ा कर ऐसी सीढ़ी हटाई कि १९६७ के विधानसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सोशलिस्ट पार्टी में विलय के बाद बने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी की तरफ से इटावा के जसवंत नगर सीट से नत्थू सिंह की जगह मुलायम सिंह यादव को टिकट दिया गया और मुलायम सिंह को संयुक्त उत्तर प्रदेश के सबसे युवा विधायक होने का गौरव प्राप्त हुआ.यहीं से मुलायम सिंह की निर्बाध राजनीतिक यात्रा शुरू हुई..आज अखिलेश यादव ने अपने राजनीतिक गुरु मुलायम सिंह की सीढ़ी को हटाकर इतिहास ही दोहराया है…


