सहरसा-अगर‐‐‐‐‐‐‐‐? 24 घंटों में कर दुंगा आत्मसर्मपण- रामांनद पहलवान

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BRAJESH

ब्रजेश भारती  

सहरसा।

कोशी दियारा क्षेत्र  में पहलवान के नाम से विख्यात कुख्यात अपराधकर्मी रामानंद यादव से हमारे वरीय संवाददाता ब्रजेश भारती की खास बातचीत का अंश-
यू तो जब जब सहरसा-खगड़िया के सीमा क्षेत्र में कोई भी अपराधीक हलचल होती है या फिर पुलिस या एसटीएफ की कार्यवाही एक अपराधी का नाम जरूर चर्चा में आता है वह है रामानंद यादव। गत माह के 18 नवम्बर को एसटीएफ के द्वारा रामानंद पर की गई छापेमारी की कार्यवाही के बाद फिर वह चर्चा का विषय बन गये हैं।

प्रश्न – गत दिनों एसटीएफ की कार्यवाही को आप क्या मानते है,पुरे मामले की जानकारी दे ?

उत्तर – मेरे व परिवार पर ये कार्यवाही गलत हैं हमने हमेशा पुलिस का साथ दिया हैं आज मेरे बेटे को फंसा कर मेरी दुनिया उजार दिया है वह शुद्धरूपेण निर्दोष है, आज तक हमने अपने बेटों को अपनी दुनिया से कोशों दुर रखा।बहुत दिनों बाद वह घर आया है वह भी मम्मी कि जिद पर उसे एसटीएफ ने राइफल दे दिया.अगर, राइफल की जांच हो और यदि वह राइफल छुआ भी हो तो कार्यवाई हो, सरकार जांच करे.

प्रश्न -पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड में वह नामजद है आप उसे निर्दोष कह रहें हैं उस घटना के वक्त रौशन कुमार कहाँ था ?

उत्तर – पता कर ले कि वह देहरादून मे था उसका परीक्षा चल रहा था कालेज का कागज जांच ले पुलिस।
प्रश्न – आपके द्वारा कई बार पुलिस की मदद की गई, पुलिस के बारे मे क्या कहना है ?
उत्तर – सब दिन हम पुलिस का मदद किये, लेकिन सब दिन मेरे साथ पुलिस घूसखोर के बात पर हमे परेशान करता रहा.लेकिन, जब पुलिस को माओवादी तंग करते है तो रामानन्द की याद आती है और जब रामानन्द से काम हो जाता है तो रामानन्द कुख्यात अपराधी.

प्रश्न – आपने सब दिन पुलिस की मदद की फिर यह कार्यवाही ?

उत्तर – अशोक मुखिया, कुलदीप यादव ने मिल कर एसटीएफ से मिल कर यह छापेमारी करवाया हैं।

प्रश्न – कौन है ये लोग और कहाँ के है ?

उत्तर – खगड़िया जिले के अलौली प्रखण्ड के और बिथान थाना के अशोक यादव..सभी मिले हुए है.एसटीएफ के साथ उस दिन छापेमारी़ मे सब थे। एसटीएफ यदि लूटने आया तो रुपया-पैसा लेता, कुर्ता साड़ी नही.

प्रश्न – क्या आप मानते है कि अशोक के साथ मिलकर यह कार्यवाई हुई ?

उत्तर – हां-हां,वे लोग साथ़ मे था.सब के लूट लिया…पुरे समाज को.अशोक यादव के पास पैसा है और वही करवाया.

प्रश्न – अशोक यादव और आपमें किस चीज को लेकर विवाद है ?

उत्तर – कोई लड़ाई नही, उसके भाई का गांव मे खून हुआ उससे क्या मतलब.सब हमको पस्त करना चाहता है.

प्रश्न – कहा जाता है कि आपके दियारा मे ना रहने से नक्सली इस क्षेत्र मे अपनी पकड़ जमा लेंगे, इसमें क्या सच्चाई है ?

उत्तर – ये बात जनता और किसान बतायेगी, सभी से पूछ सकते है.हमसे घटा है या नफा है.

प्रश्न – क्या आप इस बात से सहमत है कि नक्सली इस क्षेत्र मे अपनी पकड़ बनाना चाहते है ?

उत्तर – फूल-फूल, पकड़ है रामानन्द है और आज रामानन्द यादव जेल जायेगा और कल फिर कहाँ नरसंहार – पचास मारे या कितना कोई गारण्टी नही.

प्रश्न – आज से कुछ महीने पहले भी नक्सलियों के इस इलाके मे आने की खबर थी, कुछ जानकारी ?

उत्तर – पार्टी उतरा था यहाँ पर, एकाध सौ से..सरकार के स्पाई को भी जानकारी हुआ और हमको भी.सभी सतर्क रहे.डीएसपी साहेब बोले थाना को बचाइये, एक तरफ थाना को भी बचाये और एक तरफ रामानन्द यादव को पकड़ कर हत्या भी कर दीजिये.

प्रश्न – आपकी छवि दो तरह की है, एक तरफ अखबार मे जो निकलता है अपराधिक छवि..लेकिन गांव की जनता आपको भगवान मानती है.इस बारे मे बताये ?

उत्तर – जनता साथ है, शादी बियाह श्राद्ध टांग टूट जाना सभी मे हमारे पास नही भी होता है तो उपाय लगा व्यवस्था करते है.भीख मांग कर भी उपाय कर देते है.पैसा वाला से भी लेकर देते है.कोई आता है तो आशा लेकर आता है.

प्रश्न – राजनीति मे आने का इरादा ?

उत्तर – राजनीतिक मे उतरने को तैयार परन्तु बार-बार मुदालय बन जाते है.जेल मे रहते है तो फंसते है – बाहर आते है तो फंसते है.कही टिकट मांगने जाएंगे तो एसटीएफ सूट कर देगी.राजनीति मे मेरी बेटी-पत्नी व अन्य परिजन सब जीता.

 

उत्तर – जो पार्टी बढ़िया राज करती है उसी मे जायेंगे ताकि जनता पसन्द करे.

प्रश्न – कौन सी पार्टी,पसंदीदा पार्टी ?

उत्तर – किसी ने मदद नही की,जिसका साथ दिया सभी ने बुरा किया.

प्रश्न – आपका बेटा राजनीती मे आया है क्या कहेंगें ?

उत्तर – हर कोई चाहता है की उससे अच्छा उसका बेटा बने मै भी चाहता हंॅु पर गुंडा जाने देगा तब ना करेगा.राजनीति के लिए मेरा बेटा चुनाव लड़ा उसको भी केस में फंसा दिया।

प्रश्न – आप किसे बेहतर मानते है एसटीएफ या बिहार पुलिस, कौन भला सोचता है आपका ?

उत्तर – कोई भला नही सोचता, हम पुलिस के लिए भला सोचे.मेरे लिए कोई भी नही सोचा.यदि बिहार पुलिस भला सोचती तो बोलती कि रामानन्द यादव ने साथ दिया और ना विधायक ने साथ दिया.मैं तो उट्ठा हूँ कि काम करा लिया और लात मार कर भगा देना.

प्रश्न – नक्सलियों की दियारा क्यों पसन्द है ?

उत्तर – असली नक्सली समाजसेवी होता है, यहां जो है नक्सली घर दुआरी बन जाता है.असली माओवादी बढ़िया है, वो तो जुल्म से लड़ता है.उस पार्टी मे हम भी चार साल रहे परन्तु जब देख लिए अपने मे अपने मार काट तो इस्तीफा दे दिये. हम रहे है चार साल, जब कोई शरण नही था तब ज्वाइन किये पार्टी और पार्टी बढ़िया चलता था न्याय पर.ई सब तो लुटेरा पार्टी है.

प्रश्न – सैप जवान अर्जुन सिंह की हत्या के वक्त भी चिड़ैया को लूटना चाहा नक्सली ?

उत्तर – सैप जवान को मार दिया, बचवा का तिलक था.500 राउंड गोली चला कर पुलिस को बचाये.पुलिस घुरमा मे छुपा था.जैसे हम छुपते थे.

प्रश्न – यदि उस दिन आप ना होते तो ?

उत्तर – सब सफाया हो जाता, सब लूट लेता.वो लूटने ही आया था.

प्रश्न -अपने भविष्य को किस रूप में देखते है ?

उत्तर – भविष्य कुछ नही मेरा, ना आगे ना पीछे.जिस दिन से बच्चा गया ..इतिहास बदलना चाहता था.पढ़ लेता तो मेरा नाम हो जाता.अब वो इंजिनियर क्या होगा…

प्रश्न – दोष किसका एसटीएफ या बिहार पुलिस ?

उत्तर – एसटीएफ और गुंडा जो उसके साथ.

प्रश्न – रौशन यादव का गिरफ्तारी पर क्या कहेंगे ?

उत्तर – जिस समय रौशन को पकड़ा, जनार्दन यादव पिस्टल निकाल कर दिया.जांच करे सरकार… रौशन यादव राइफल छूआ या नही.हम तो भागले घूरते है और बेटा मुदालय है।

प्रश्न – नोटबन्दी पर क्या कहेंगे ?

उत्तर – बहुत दिक्कत, खेती करने मे दिक्कत है,हमलोग किसान है अभी खेतीबारी का समय है ना पुराना नोट से खाद मिलता है ना ही बीच खेती चौपट हो गई हैं।

प्रश्न – आगे की क्या है योजना ?

उत्तर – रौशन और धर्मवीर के केस की जांच करे और यदि दोषी नही तो दोष मुक्त किया जाये तो मैं चैबीस घण्टे के अंदर सरेंडर कर दूंगा और नहीं तो नही सरेंडर करेंगे..मर जायेंगे मंजूर है

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