सहरसा-अगर रेल प्रशासन सजग रहती तो नही होता रेल परिचालन बाधित

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ब्रजेश भारती

सिमरी बख्तियारपुर,सहरसा।

कटाव निरोधी कार्य पर प्रत्येक वर्ष करोड़ों रूपये कोशी के पानी में बहाया जा रहा हैं।

पिछले कई दिनों से नेपाल के तराई व पहाडी ईलाकों के अलावा उत्तर बिहार में लगातार हो रही मानसुन के बारिश कि बजह से कोशी के जलस्तर में भारी बृद्धि के कारण सहरसा मानसी रेलखंड पर पानी का दबाव बन गया जिसके कारण रविवार को समस्तीपुर मंडल के डीआरएम सुधाशु शर्मा ने रेलपरिचालन तीन दिनों के लिये बंद कर दिया। पिछले 15 दिनों से विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से रेलप्रशासन को आगाज किया जा रहा था कि इस रेलखंड पर कभी भी पानी के दबाव के कारण रेलपरिचालन बाधित हो सकता है लेकिन रेलप्रशासन अपनी कुंभकर्णी से जगने का नाम नही ले रही थी शनिवार को डीआरएम ने जब स्वंय कटाव स्थल का निरक्षण किया तो यात्री सुरक्षा नजर आने लगी और रेलपरिचालन बंद करने कि धोषणा कर दी।
प्रत्येक साल परिचालन पर पड़ता असर- जब से छोटी लाईन से बड़ी लाईन बना है तब से ही फनगों हाल्ट के बीच नदी का कटाव होता रहा है जब पानी का स्तर कम होता है तो रेलप्रशासन कुछ नही करती पानी का स्तर बढ़ जाने के बाद कटाव निरोधी कार्य शुरू किया जाता हैं। स्थानिय ग्रामीणों का कहना है कि ठीकेदार व रेल अधिकारी कि मिलीभगत के कारण कभी रेलवे के अधिकारी कटाव का स्थाई निदान करना ही नही चाहती हैं एक बार स्थाई निदान हो जायेगा तो भी कटाव का खेल कैसे होगा यही कारण है कि प्रत्येक साल करोड़ों कि रशि पानी में बहा दी जाती हैं।
बोल्डर के प्रयोग पर उठ रहा सवाल- रविवार को रेलपरिचालन के बाद 29 बैगन बोल्डर कटाव स्थल पर लाया गया कहने को तो 29 बैगन बोल्डर लाया गया लेकिन किसी भी बैगन में 200 पीस बोल्डर नही देखा गया वही स्थानिय जिप सदस्य ओमप्रकाश नारायण ने वहां मौजूद इंजिनियर को बताया कि बोल्डर डालकर कटाव रोकने का फामूर्ला सही नही है चुकि एक एक बोल्डर डालने से नदी का पानी उसे बहा ले जाती है साथ ही केरेटिंग भी कुछ देर के लिये कटाव को रोक देती है लेकिन कोशी नही अपनी रोद्र रूप् के लिये जानी जाती है जब वह अपना उस रूप में आ जाती है तो सभी केरेटिंग बोल्डर को भी बहा ले जाती हैं।
उठने लगी स्थाई निदान कि मांग- रविवार को रेलपरिचालन बद हो जाने के बाद नेतओं का कटाव स्थल पर पहुंचने का शिलसिला शुरू हो गया पूर्व जिप उपाध्यक्ष रितेश रंजन ने कटाव स्थल पर मौजूद डीआरएम से बार्ता कर कहा कि अगर तीन दिनों के अन्दर परिचालन शुरू नही हुआ एवं इसका स्थाई निदान कि ओर कोई ठोस कदम नही उठाया गया तो वे धरणा प्रर्दशन कर अपनी बात को रखने का काम करेंगें।
रेल परिचालन से बड़ी आबादी हुआ प्रभावित- रेल परिचालन बंद होेने के साथ कोशी का सीधा सम्र्पक राज्य कि राजधानी से भंग हो गया है लगभग 90 लाख कि आबादी प्रभावित हुई हैं।इससे पूर्व कोशी का सीधा सड़क सम्र्पक डुमरी पुल के टुट जाने के कारण पहले से ही प्रभावित है ऐसे में रेल पर निर्भर था ईलाका लेनिक वह भी खत्म हो गया हैं।

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