Jharkhand politics- Amit khare को मुख्य सचिव नहीं बनाना ले डूबा रघुवर दास को

रघुवर दास को हीरे की नहीं थी परख, इसलिए हाथ से फिसल गई कुर्सी

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कड़क आइएएस अफसर अमित खरे को प्रधानमंत्री ने बनाया अपना सलाहकार, लेकिन रघुवर दास ने अपने भ्रष्ट किचन कैबिनेट के बहकावे में आकर नहीं बनाया मुख्य सचिव

 बिहार झारखंड न्यूज नेटवर्क ब्यूरो, झारखंड

सत्ता हाथ में आती है तो आगे-पीछे ऐसे लोग लग जाते हैं जो कुर्सी पर बैठे लोगों को सच्चाई का आभास नहीं होने देते। पहली बार पांच साल तक झारखंड में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने वाले रघुवर दास के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जमीनी नेता रहे रघुवर दास के सत्ता में आते ही आसपास ऐसे लोगों का जमावड़ा बना, जो उनकी कुर्सी लेकर डूब गया। यही नहीं, उन्हें अपनी परंपरागत जमशेदपुर पूर्वी सीट से भी हार का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उनकी यह स्थिति वाकई आश्चर्यजनक थी, लेकिन झारखंड की नौकरशाही में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि रघुवर दास ने समय पर भारी गलती की, जिसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा। अपनी किचन कैबिनेट के साथ-साथ उन्होंने अधिकारियों के चयन में भी गंभीर लापरवाही बरती। विवादित आइएएस अधिकारी राजबाला वर्मा (अब रिटायर्ड) को मुख्य सचिव बनाना भारी गलती थी, जिससे भाजपा समेत आरएसएस के अधिकारी नाराज हुए। उनकी दूसरी गलती उस वक्त डेवलपमेंट कमिश्नर रहे अमित खरे को मुख्य सचिव की कुर्सी नहीं देना था। खरे सरीखा कड़क और इमानदार आइएएस अधिकारी होता तो रघुवर दास को ऐसा दिन नहीं देखना पड़ता। उन्होंने अमित खरे को यही आश्वासन देकर उस वक्त दिल्ली केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से रोका था, लेकिन अपने किचेन कैबिनेट और भ्रष्ट मंडली के दबाव में उन्होंने सुधीर त्रिपाठी को मुख्य सचिव बना दिया। इस मंडली को डर था कि अमित खरे के रहते हुए वे भ्रष्ट कार्यों को अंजाम नहीं दे पाएंगे। उधर सुधीर त्रिपाठी मुख्य सचिव बने और इधर अमित खरे ने दिल्ली की राह पकड़ी। अमित खरे ने अपने कामकाज के बूते अलग पहचान बनाई और टीम मोदी का अहम हिस्सा बनें। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में रहते हुए अभूतपूर्व कार्य किया। डिजिटल मीडिया के लिए पालिसी बनाई। उच्च शिक्षा मंत्रालय में रहकर उन्होंने नई शिक्षा नीति को लागू करने में अहम भूमिक निभाई। इसका असर यह पड़ा कि रिटायरमेंट के तुरंत बाद उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना सलाहकार नियुक्ति कर लिया। वे उनकी नीति निर्धारक टीम में शुमार होंगे।

अमित खरे को अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद झारखंड की ब्यूरोक्रेसी में इसकी चर्चा जोरों पर है। हालांकि झारखंड में अधिकारियों का ऐसा कुनबा है जो हर सरकार में अपनी पकड़ कायम रखता है। उदाहरण के तौर पर एक महिला अधिकारी पिछले सरकार में भी अहम पद पर थीं। सरकार बदलने के बाद उन्हें कुछ माह के लिए साइड कर दिया गया, लेकिन अभी वह महत्वपूर्ण विभागों पर काबिज हैं। उनके खिलाफ कई संगीन आरोप हैं और जांच चल रही है। इस महिला अधिकारी के बारे में रघुवर दास के कार्यकाल में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान एक फरियादी ने खुलासा किया था। वह फरियादी महिला अधिकारी को नहीं पहचानता था, लेकिन कृषि विभाग में रिश्वतखोरी की शिकायत करते हुए उन्होंने उनका नाम लिया। मुख्यमंत्री के समक्ष यह कहा कि अधिकारी कहते हैं कि मैडम तक पैसा पहुंचाना पड़ता है। उस समय वह महिला अधिकारी भी जनसंवाद कार्यक्रम में मौजूद थीं। सरेआम बेइज्जती होता देख वह शर्म से लाल हो गईं।

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