नीतीश का इस्तीफा, शरद ने दिए लालू के साथ मोर्चा बनाने के संकेत

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लोकसभा चुनाव परिणाम से आहत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपराह्न 3.15 बजे राजभवन जाकर अपना और मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों का त्यागपत्र राज्यपाल को सौंपा। उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश नहीं की है। आगे की रणनीति बनाने के लिए रविवार को जदयू विधानमंडल दल की बैठक बुलाई गई है। इसमें नए नेता का चुनाव होगा। नए सिरे से सरकार का गठन होगा। नीतीश ने कहा-वैकल्पिक सरकार का रास्ता खुला है। सरकार, जो चाहे बना ले। जदयू के साथ बहुमत का कोई संकट नहीं है।

राज्यपाल को त्यागपत्र सौंपने के बाद मुख्यमंत्री निवास में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह बिहार में पार्टी के चुनाव अभियान का नेतृत्व कर रहे थे। जो जनादेश आया, उसे स्वीकार करते हैं और नैतिकता के आधार पर जिम्मेदारी लेते हुए त्यागपत्र दिया है। नीतीश ने कहा, लोगों ने हमें पांच साल के लिए चुनकर भेजा है। विधानसभा गठन में मेरी प्रमुख भूमिका थी। वैकल्पिक सरकार बनाने के रास्ते खुले हैं। आगे की प्रक्रिया राज्यपाल देखेंगे। यह उनके क्षेत्राधिकार का मामला है। उन्होंने बिना नाम लिए नरेंद्र मोदी को शुभकामना दी। कहा कि विशेष राज्य पर हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

नीतीश के मुताबिक बिहार में जो नतीजे आए, यह सांप्रदायिक आधार पर मतों का ध्रुवीकरण था। राजनीतिक जीवन में पहली बार ऐसा देखा। यह शुभ नहीं है। मगर जनादेश है। जनता ने वोट दिया है। जनादेश का सम्मान होना चाहिए। अंतिम परिणाम के बारे में कोई भ्रम नहीं है वे [भाजपाई] सरकार बनाएंगे और चलाएंगे।

देश के सामने गंभीर मुद्दे हैं, युवाओं को स्वप्न दिखाया गया है, वादे किए गए हैं, रोजगार के अवसर की बात की गई है। उम्मीद करते हैं कि उसे पूरा किया जाएगा। अच्छे दिन आ गए हैं, सब अनुभव करेंगे।

मैं ने ली हार की जिम्मेदारी

नीतीश ने कहा कि हम अपनी मान्यता, विचार, कार्यक्रम के आधार पर आगे काम करते रहेंगे। लोकसभा चुनाव का नतीजा आया है, विधानसभा के लिए आपको पांच साल का जनादेश मिला है? मैंने इस्तीफा दिया है। जदयू के समक्ष बहुमत का संकट नहीं है। भाकपा, कांग्रेस और निर्दलीय सदस्यों का भी समर्थन हासिल है। चाहे तो सरकार रह सकती है मगर जो राजनीतिक नतीजे आए, मैंने हार की जिम्मेदारी ली।

भाजपा से दूर हटने का फैसला सही

भाजपा से रिश्ते तोड़ने के अपने पुराने फैसले को बिल्कुल सही ठहराते हुए कहा कि सिद्धांत के आधार पर निर्णय किया था। बोले-इसकी पृष्ठभूमि महीनों से तैयार की जा रही थी। अफसोस है कि अब कोई सैद्धांतिक लाइन नहीं ले सकता। बिना विचारधारा के तालमेल था। जब लगा कि नहीं चल सकता तो तोड़ दिया। मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है। हम परिणाम के आधार पर निर्णय नहीं लेते।

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