नई दिल्ली-रेल मंत्री ने ‘मिशन 41के’ पेश किया

भारतीय रेलवे की ऊर्जा संबंधी पहलों पर बाह्य हितधारकों के साथ गोलमेज परिचर्चा

नई दिल्ली।

रेल मंत्री  सुरेश प्रभाकर प्रभु ने भारतीय रेलवे की ऊर्जा संबंधी पहलों पर बाह्य हितधारकों के साथ गोलमेज परिचर्चा के दौरान ‘मिशन 41के’ के बारे में विस्‍तृत जानकारी दी।  सुरेश प्रभु ने कहा कि रेल मंत्रालय ने अगले दशक में रेलवे की ऊर्जा लागत में 41,000 करोड़ रुपये की बचत करने के लिए ‘मिशन 41के’ तैयार किया है। उन्‍होंने कहा कि विभिन्‍न हितधारकों की भागीदारी के साथ इस व्‍यापक रणनीति पर अमल के लिए हम नियामकीय रूपरेखाओं से लाभ उठायेंगे और नई प्रौद्योगिकियों पर गौर करेंगे। उन्‍होंने कहा कि यह सभी चीजों पर नये सिरे से गौर करने और एक आदर्श आधार-रेखा निर्धारित करने का एक अच्‍छा अवसर है। रेल मंत्री ने कहा कि पिछले दशक में किये गये समस्‍त विद्युतीकरण कार्यों को दोगुना किया जायेगा और यह भारतीय रेलवे के ऊर्जा मिश्रण को बदल कर रख देगा। भारतीय रेलवे ने 1000 मेगावाट सौर बिजली और 200 मेगावाट पवन ऊर्जा का लक्ष्‍य रखा है।

श्री प्रभु ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे की विभिन्‍न पहलों पर हितधारकों के साथ लगभग 15-16 गोलमेज सम्‍मेलन आयोजित करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा कि डेटा विश्लेषण पर एक गोलमेज परिचर्चा आयोजित करने की योजना है। भारतीय रेलवे बड़ पैमाने पर डेटा सृजित करती है और इसके पास स्‍व उपयोग के लिए विशाल ऑडियंस हैं। इन सभी का इष्‍टतम इस्‍तेमाल करने की क्षमता हासिल कर लेने से भारतीय रेलवे के लिए अतिरिक्‍त राजस्‍व सृजित करना संभव हो जायेगा।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन  ए. के. मित्तल ने कहा कि कुल माल ढुलाई के 45 फीसदी को ढोने का लक्ष्‍य तभी हासिल किया जा सकता है जब इससे ढुलाई करना किफायती साबित होगा। इसके परिणामस्‍वरूप रेलवे अब सड़क क्षेत्र के साथ प्रतिस्‍पर्धा करने लगी है। मौजूदा समय में 70 फीसदी ढुलाई बिजली कर्षण (विद्युत ट्रैक्शन) पर होती है। अगले 6-7 वर्षों में 90 फीसदी ढुलाई विद्युत ट्रैक्शन पर करने का लक्ष्‍य तय किया गया है। खुली पहुंच के जरिये बिजली की खरीद सुनिश्चित करने से विद्युत खरीद की लागत काफी कम हो गई है, जिसका संचालन व्यय में 25 फीसदी हिस्‍सा होता है। उन्‍होंने यह भी कहा कि रेल मंत्रालय ने आवागमन की औसत गति में हर वर्ष 5 किलोमीटर प्रति घंटे की वृद्धि करने के लिए ‘मिशन रफ्तार’ शुरू किया है। भारतीय रेलवे का एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण मिशन मधेपुरा और मरहौरा में उच्च अश्वशक्ति (एचपी) वाले लोकोमोटिव विनिर्माण संयंत्र की स्थापना करना है।

सदस्‍य (ट्रैक्शन)  ए के कपूर ने कहा कि रेलवे में अब तक लगभग 50 फीसदी मार्गों को विद्युतीकृत किया जा चुका है, जो ऊर्जा संबंधी बिल को कम रखने और कार्बन के उत्‍सर्जन को कम करने में बहुमूल्‍य योगदान दे रहे हैं। रेल मंत्रालय अपने मिशन विद्यतीकरण के जरिये अगले कुछ वर्षों में विद्युतीकरण को 90 फीसदी के स्‍तर पर ले जाना चाहता है, ताकि आयातित ईंधन पर निर्भरता घट सके। ऊर्जा मिश्रण में बदलाव लाना और रेलवे की ऊर्जा लागत को तर्कसंगत करना भी इसके प्रमुख उद्देश्य हैं।

गोलमेज परिचर्चा में रेलवे बोर्ड के सदस्‍यों और वरिष्‍ठ अधि‍कारियों तथा ऊर्जा क्षेत्र की विभिन्‍न सरकारी एवं निजी एजेंसियों, अंतर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों ने भी भाग लिया।

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