विलासपूर।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (दपूमरे) के नागपुर मंडल में रेलगाड़ियों की सुरक्षा और सुचारू परिचालन सुनिश्चित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक बड़ी पहल की है। ट्रेनों पर पत्थरबाजी और रेलवे ट्रैक पर लोहे या लकड़ी के टुकड़े रखकर बाधा उत्पन्न करने जैसी घटनाओं पर पूर्ण रूप से लगाम लगाने के लिए एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यह विशेष मुहिम ‘सामुदायिक पुलिस व्यवस्था’ के तहत संचालित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों, उनके माता-पिता, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों को ऐसी घटनाओं के खतरनाक परिणामों और इससे जुड़े सख्त कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक करना है।
खेल-खेल में होने वाली गलतियों से बड़े हादसे का खतरा
रेलवे द्वारा प्राप्त जांच रिपोर्टों और विभिन्न घटनाओं के सूक्ष्म विश्लेषण से एक चिंताजनक बात सामने आई है। कई मामलों में यह पाया गया है कि रेलवे लाइनों के आसपास रहने वाले बच्चे अक्सर खेल-खेल में या महज़ उत्सुकतावश तेज गति से चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं। इसके अलावा, कई बार शरारती तत्व या बच्चे ट्रैक पर लकड़ी, पत्थर या लोहे के भारी टुकड़े रख देते हैं। यह सिर्फ एक बचकानी हरकत नहीं है, बल्कि एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। ऐसी लापरवाही से बड़ी और भीषण रेल दुर्घटना हो सकती है, जिससे सैकड़ों निर्दोष यात्रियों की जान जोखिम में पड़ सकती है और करोड़ों रुपये की राष्ट्रीय संपत्ति का भारी नुकसान हो सकता है।
दीप चंद्र आर्य के नेतृत्व में सघन जनसंपर्क
नागपुर मंडल में इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मंडल सुरक्षा आयुक्त दीप चंद्र आर्य के मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई है। नागपुर मंडल के सभी निरीक्षक प्रभारियों के नेतृत्व में संवेदनशील और अति-संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां सघन अभियान चलाया जा रहा है। आरपीएफ की टीमें सीधे स्थानीय नागरिकों से संपर्क कर रही हैं, ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें कर रही हैं और बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों की विशेष काउंसलिंग कर शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं।
खेलकूद और प्रतियोगिताओं के जरिए दी जा रही सीख
बच्चों को इस गंभीर विषय के बारे में आसानी से समझाने के लिए आरपीएफ ने एक रचनात्मक तरीका अपनाया है। बच्चों के बीच क्रिकेट, शतरंज, दौड़, चम्मच दौड़ और ट्रे-पासिंग जैसी विभिन्न रोचक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। इन प्रतियोगिताओं में जीतने वाले बच्चों को आकर्षक पुरस्कार दिए गए, जबकि भाग लेने वाले अन्य बच्चों को सांत्वना पुरस्कार और खाद्य सामग्री बांटकर उनका मनोबल बढ़ाया गया। इसी खेल-कूद के माहौल में बच्चों को यह महत्वपूर्ण सबक सिखाया गया कि ट्रेन पर पत्थर मारना या ट्रैक पर कोई वस्तु रखना कोई मजाक नहीं, बल्कि एक दंडनीय अपराध है।
तीन राज्यों के कई जिलों में पहुंचा जागरूकता का संदेश
16 अप्रैल 2026 से शुरू हुई इस विशेष मुहिम ने मात्र 15 दिनों के भीतर बड़ी सफलता हासिल की है। इस छोटी सी अवधि में आरपीएफ की टीमों ने नागपुर मंडल के क्षेत्राधिकार में रेलवे लाइन के किनारे स्थित लगभग 27 शिक्षण संस्थानों, 11 गांवों व बस्तियों और 3 प्रमुख खेल मैदानों तक अपनी पहुंच बनाई। इस दौरान कुल 408 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह महा-अभियान महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों—जैसे नागपुर, गोंदिया, भंडारा, गढ़चिरौली, बालाघाट, छिंदवाड़ा, मंडला, सिवनी और राजनांदगांव के स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर सफलतापूर्वक चलाया गया।
आरपीएफ की अपील और 139 हेल्पलाइन का उपयोग
रेलवे सुरक्षा बल ने नागपुर मंडल के सभी अभिभावकों, स्कूल प्रिंसिपलों, जन-प्रतिनिधियों और आम रेल यात्रियों से एक बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। यदि किसी भी व्यक्ति को कहीं भी ट्रेनों पर पत्थरबाजी होते हुए दिखे, या कोई रेलवे ट्रैक पर अवरोधक सामग्री रखता हुआ नजर आए, तो उसकी सूचना तुरंत निकटतम आरपीएफ (RPF) पोस्ट पर दें। इसके अलावा, रेलवे के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 139 पर भी तत्काल कॉल करके जानकारी दी जा सकती है। रेलवे प्रशासन ने आम जनता को यह पक्का विश्वास दिलाया है कि ऐसी महत्वपूर्ण सूचना देने वाले किसी भी नागरिक की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।




