मधुबनी-पवन के घर पर छत नहीं, चढ़ता था फॉर्च्यूनर पर

RAJ KUMAR JHA

राजकुमार झा

मधुबनी.
दिल्ली के ग्रेटर नोएडा में हथियार के साथ पकड़े गए नक्सलियों में मधुबनी जिले के झंझारपुर के रुद्रपुर गांव के पवन झारखंडी उर्फ भाई जी उर्फ पवन झा का नाम सामने आने की सूचना से ग्रामीण हतप्रभ हैं। लोगों को सहज विश्वास नहीं हो रहा की गांव का एक शर्मीला युवक दिल्ली जाकर अपराधी बन गया। टीवी पर पवन का फोटो देखने के बाद लोगों में यह चर्चा का विषय बन गया। पिता दिनेश झा किसान हैं व मां गृहणी। पवन उनका सबसे बड़ा बेटा है।

पवन के बारे में पूछे जाने पर माता-पिता थोड़ा घबराते हैं, फिर रोते हुए कहते हैं- वह तो गांव भी नहीं आता था। पिता से ठीक से बात नहीं करता था। मां सुभिता देवी को बेटे के नक्सली होने का विश्वास नहीं है। वह अपना घर दिखाते हुए कहती है- जो एक कमरे का मकान नहीं बनवा सका, मां-बाप को कुछ भी पैसा नहीं भेजता, गांव में कभी किसी तरह का अपराध नहीं किया, वह कैसे इतना बड़ा अपराधी हो गया। छह भाई-बहनो में सबसे बड़ा पवन मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास करने के बाद परिवार की माली हालात देख नौकरी करने दिल्ली चला गया। पिता दिनेश झा आज भी भैंस का दूध बेच परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

ढाई साल से बदल गया था रहन-सहन
ग्रामीणों की मानें तो बीते दो ढाई साल से पवन के रहन-सहन में परिवर्तन देख लोग दंग थे। सात माह पूर्व दिल्ली से गांव आते समय पवन की फॉर्च्यूनर कार दुर्घटनाग्रस्त हो गयी थी। उसमें सवार छह में चार लोगों की मौत हो गयी थी। घायल ड्राइवर संग्राम का इलाज पवन ने कराया। दुर्घटना में पवन को कुछ भी नहीं हुआ। घर पर छत नहीं और फॉर्च्यूनर की सवारी करते देख गांव के लोग अचरज में पड़ गए थे।

दुर्गापूजा में दिया था सबसे अधिक चंदा
ग्रामीण संतु झा ने बताया कि पवन गांव की दुर्गापूजा में सबसे अधिक चंदा देकर भी अपनी कमाई का एहसास कराया था। बावजूद इसके लोगों को यह नहीं पता था कि वह नक्सली बन गया है। स्थानीय थाने में पवन का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। दिल्ली में गिरफ्तारी के बाद एएसपी निधि रानी ने रुद्रपुर थानाध्यक्ष प्रदीप गौड़ को पवन के बारे में पूरी जानकारी करने व उसके लोकल कनेक्शन को खंगालने का निर्देश दिया है।

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