चंडीगढ़-कीमती कैमरा नहीं,छायाकार की सोच महत्वपूर्ण- मंजीत सिंह

प्रेस दिवस पर फोटोग्राफी पर कार्यशाला संपन्न
चंडीगढ़।
प्रेस में छपने वाले फोटो हों या अन्यत्र  ,कीमती कैमरा से ज्यादा मायने छायाकार की सोच रखती है ,जो फोटो खींचते समय उसके दिमाग में होनी चाहिए कि किस मकसद से तस्वीर ली गयी है.उक्त विचार चंडीगढ़ के जी.जी.डी.एस.डी.कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय संस्था सेंटर फॉर इन्टरनेट एंड मीडिया एथिक्स (सिमे ) तथा इंडियन जर्नलिस्ट्स वेलफेयर फाउंडेशन के सान्निध्य में राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर कॉलेज द्वारा आयोजित फोटोग्राफी कार्यशाला में पी.टी.आई.के अवकाश प्राप्त वरिष्ठ छायाकार मंजीत सिंह ने कही. श्री सिंह ने कहा कि उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट से डिजिटल युग फोटोग्राफी का दौर देखा है ,लेकिन तकनीकी युग में भी कैमरे के पीछे खड़े व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है,कैमरा तो मात्र एक साधन है.
एन.डी.टी.वी.के विडियो पत्रकार अर्पित जायसवाल ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि दर्शक या पाठक कैमरे के पीछे खड़े छायाकार को नहीं जानते लेकिन उसके कार्य से उसकी मंशा का आंकलन कर सकते हैं.उन्होंने फोटोग्राफी में नैतिक सिद्धान्तों पर बल दिया.
कार्यशाला में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. भूषण शर्मा ने कहा कि मीडिया में फोटोग्राफी की अहम् भूमिका है.जो बात हज़ार शब्द नहीं कह  पाते,एक फोटो उसे बयां कर देते हैं. मीडिया फोटोग्राफी का समाज में काफी गहरा असर है.
छात्रों द्वारा पूछे गए प्रश्न पर वक्ताओं ने अनैतिक और अश्लील फोटो पर दर्शकों और पाठकों से आपत्ति दर्ज करने की सलाह दी.
इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में बबिता सैनी ,राधिका और अतुला को क्रमशः प्रथम ,द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.प्रतियोगिता की निर्णायक कॉलेज की वरीय शिक्षिका आशिमा धीर और सुनीला शर्मा थीं. कार्यक्रम को सफल बनाने में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख प्रिया खन्ना चढ्ढा ने अहम् भूमिका निभाई.
सिमे के दक्षिण एशिया संचार प्रमुख विजय सिंह ने कार्यशाला आयोजित करने हेतु कॉलेज प्रसाशन और प्रतियोगिता के विजेताओं को बधाई दी ..

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