
नमन का स्वामी जी को नमन “

# स्वामी जी ने पुरे विश्व में लहराया भारतीय संस्कृति का परचम – मनोरंजन
# नमन के कार्यक्रम में आ कर फक्र महसूस होता है – यहाँ राष्ट्रीय चेतना का निर्माण होता है- सलेन्द्र सिंह
# स्वामी जी के विचारों को सत्-सत् नमन – जयप्रकाश
# नमन के कार्यक्रम सराहनीय- रघुनाथ
# भारतीय गौरव को स्वामी जी ने सुन्य से सिखर तक पहुँचाया – अजय
# नमन ने देशभक्तों के लिये वास्तव में लगाये मेले – नमन को साधुवाद – सांसद प्रतिनिधि
# ईश्वर युवाओं के स्वाभिमान की रक्षा करें – स्थिति विस्फोटक – काले
जमशेदपुर। “यदि प्रेरणा शहीदों से नहीं लेंगे तो यह आजादी ढलती हुई साझ हो जाएगी और पूजे न गए वीर तो सच कहता हूं कि जवानी बाझ हो जाएगी””ये बाते आज साकची गोल चक्कर पर नमन संस्था की तरफ से आयोजित विवेकानंद जी के श्रद्धांजलि सभा और युवा दिवस के अवसर पर हिंदुस्तान पत्रिका के संपादक मनोरंजन सिंह जी ने कहीं
नमन परिवार के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धांजलि के बाद सभा को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए डॉक्टर मोहम्मद जकरिया , करीम सिटी के प्राचार्य ने कहा की सांस्कृतिक विरासत और इतिहास को यदि हमने सन्जो कर नहीं रखा , जिसकी बुनियाद पर किसी भी राष्ट्र का भविष्य का या महल खडा होता है तो और राष्ट्र कभी अपने वैभव को प्राप्त नहीं कर सकता|
स्वामी विवेकानंद आज भी हमारे लिए उतना ही उतना ही प्रासंगिक है जितना की 1893 में धर्म सभा को संबोधित करने के पूर्व भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक सहिष्णुता के प्रखर सिपाही के रूप में थे| आज उनकी 156 वी जयंती के अवसर पर हम सभी उस राष्ट्र गौरव को मात्र सम्मान नहीं दे रहे हैं बल्कि आने वाले पीढ़ी के लिए एक संदेश छोड़ रहे हैं जहां से संकल्प की धारा बहती है |नमन परिवार के द्वारा रखी गई ये श्रद्धांजलि सभा उस महामना के प्रति सच्ची कृतज्ञता है |
संस्था के संस्थापक संरक्षक अमरप्रीत सिंह काले ने अपने सम्बोधन में कहा कि लिख
“”रहा हूं मैं अंजाम जिसका कल आगाज आएगा!
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा !
क्योंकि है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गए हैं !
है नमन उनको जिनके सामने बौना हिमालय जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गए हैं |
श्री काले ने कहा की वर्तमान में भी अतीत की वही चुनौतियां है जो उस समय हुआ करती थी क्योंकि भय भूख भ्रष्टाचार का स्वरूप बदला है लेकिन ईसे समाप्त करने की राजनीतिक इच्छा शक्ति मर गई हैं|
युवाओं के लिए चुनौती रोजगार से लेकर नशा खोरी की बढती लत उनमें जीवन के प्रति प्रेम को कम कर रही हैं| आज वैसे लोगों की फौज खडी हैं जो सत्ता को सेवा नहीं अपितु लूट का अवसर समझते हैं| सत्ता वैसे लोगों की पोषक बन चुकी है जो स्वार्थ के वशीभूत सत्ता का उपयोग करते हैं | आज जरूरत है कि हम संकल्प ले कि समाज की बुराइयों से हम एक साथ मिलकर लड़ेंगे| समाज में नशाखोरी मातृशक्ति पर हो रहे प्रहार और राजनीति की भूख की बढती पिपाशा को समाप्त करने के लिए संकल्पित होकर युवा कार्य करेंगे |
सभा को ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्वी कमान के अध्यक्ष सतनाम गंभीर ,वरुण कुमार ,बिमला देशाई , रतन महतो , नीरू सिंह , सतीश सिंह आदि ने भी संबोधित किया कार्यक्रम का विषय प्रवेश संस्था के संयोजक राजीव कुमार और संचालन डी डी त्रिपाठी ने किया|
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सिद्धनाथ सिंह जी रतन महतो रीता सिंह हेमलता अरविंदर कौर काजू साण्डिल अमर सिंह, राजेश सिंह ,सतीश सिंह बलवीर मंडल ,संजीव कुमार, शंकर रेडी ,वरुण कुमार ,अनिल सिंह

