
जमशेदपुर। आनन्दमार्ग प्रचारक संघ महिला कल्याण द्वारा महिलाओं एवं बच्चों का दो-दिवसीय व्यक्तित्व निर्माण षिविर का आयोजन आनंदमार्ग आश्रम, गदड़ा, राहरगोड़ा में आयोजित किया गया। यह शिविर 5 मार्च 11ः00 बजे दिन से 6 मार्च दोपहर 3ः00 बजे तक आयोजित किया गया है। इस षिविर में षारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास के विशय में जानकारी दी जाएगी। मनुश्य का सर्वांगीण विकास तभी संभव है जबतक मनुश्य मानसिक, षारीरिक एवं आध्यात्मिक रूप से विकसित हो। अवधूतिका आनंद चितप्रभा आचार्या ने कहा कि जीवात्मा के परमात्मा के साथ एकाकार होने का नाम ही योग है। जिस तरह पानी और चीनी को मिलाने से एकाकार हो जाता है यानि मिलने के बाद चीनी और पानी को अलग अस्तित्व नहीं रहता उसी तरह अध्यात्मिक साधना के माध्यम से जब साधक परमात्मा के साथ मिलकर एक हो जाता है तो उस समय मैं तथा परमात्मा का बोध का अस्तित्व नहीं रहता। आनन्दमार्ग के योग साधना में जीवात्मा को परमात्मा के साथ मिलाने की जो अध्यात्मिक साधना की प्रक्रिया है वही योग है। आसन करने से षरीर और मन स्वस्थ्य रहता है। यह ग्रन्थि दोश को दूर करता है। आसन करने से मन अप्रिय चिन्ता से दूर होता है। यह सूक्ष्म और उच्चकोटि के साधना में काफी मददगार साबित होता है। नियमित आसन करने से षरीर में लचीलापन आता है। योग करने से षरीर और मन का संतुलन बना रहता है। प्राणायाम एक ष्वांस की प्रक्रिया है जो ष्वांस नियंत्रण के साथ ईष्वरीय भाव आरोपित करता है। इस दो दिवसीय षिविर कार्यक्रम में काफी संख्या में बच्चों एवं महिलाओं के भाग लेने की संभावना है। षिविर को सफल बनाने के लिए डाॅ0 आषु, इन्दू देवी, सत्यवती देवी, रूपा देवी, रानी सिंह तथा अन्य महिलाओं का भी सहयोग मिल रहा है।



