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Home » नई दिल्ली-रेलवे क्षेत्र को मिली नई गति, सीसीईए ने अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण को मंजूरी दीरेलवे क्षेत्र को मिली नई गति, सीसीईए ने अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी
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नई दिल्ली-रेलवे क्षेत्र को मिली नई गति, सीसीईए ने अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण को मंजूरी दीरेलवे क्षेत्र को मिली नई गति, सीसीईए ने अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी

BJNN DeskBy BJNN DeskFebruary 18, 2016No Comments6 Mins Read
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नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेनद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने देश के विभिन्न हिस्सों में यात्री एवं माल ढुलाई दोनों की ही बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए छह रेल लाइनों और एक रेल पुल के निर्माण को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव पर 10,700 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की लागत आएगी और कुल खर्च के अधिकांश हिस्से को अतिरिक्त बजटीय संसाधनों के माध्यम से पूरा किया जाएगा। छह मंजूर परियोजनाओं का ब्यौरा नीचे दिया गया है।

1) हुबली-चीकाजुर रेल लाइन का दोहरीकरण

190 किलोमीटर लंबी हुबली-चीकाजुर ब्रॉड गेज एकल रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है। इस पर कुल मिलाकर 1294.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। यह परियोजना 13वीं योजनावधि के दौरान सवा चार वर्षों में पूरी होने की संभावना है और यह चित्रदुर्ग, दावणगेरे, हावेरी एवं धारवाड़ क्षेत्रों को कवर करेगी।

दोहरीकरण के लिए पुणे-मिराज-हुबली-बेंगलुरू के समूचे रूट की पहचान की गई है, जिससे न केवल यातायात के प्रवाह में और ज्यादा सुगमता आएगी, बल्कि इस क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई गति मिलेगी।

यह खंड मुंबई एवं बेंगलुरू के बीच यात्री रेलगाड़ियों और मंगलोर स्थित बंदरगाहों तक जाने वाली मालगाड़ियों के एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क का हिस्सा है। इस रूट पर बेंगलूर-टुमकुर और अर्सिकेरे-चीकाजुर के दोहरीकरण का काम पहले ही पूरा कर लिया गया है। शेष हिस्से में हुबली-लोंडा-वास्को-डा-गामा के हुबली-लोंडा भाग के दोहरीकरण का काम भी जारी है।

2) वर्धा (सेवाग्राम)-बल्लारशाह तीसरी रेल लाइन का निर्माण

132 किलोमीटर लंबी वर्धा (सेवाग्राम)-बल्लारशाह तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य 1443.32 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ शुरू किया जाएगा। यह परियोजना 13वीं योजनावधि के दौरान पांच वर्षों में पूरी होने की संभावना है और यह वर्धा एवं चंद्रपुर जिलों में अवस्थित होगी।

इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग अपनी पूर्णता पर पहुंच चुका है और इस खंड पर अतिरिक्त मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों एवं मालगाड़ियों की आवाजाही से ट्रेनों का परिचालन बाधित होता है। वर्धा (सेवाग्राम)-बल्लारशाह खंड नागपुर प्रभाग से आने वाली वस्तुओं के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां इस खंड पर अनेक कोयला खदानें और कई छोटी पटरियां प्रस्तावित हैं।

3) रमना-सिंगरौली रेल लाइन का दोहरीकरण

160 किलोमीटर लंबी रमना-सिंगरौली रेल लाइन के दोहरीकरण को 2675.64 करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई है और यह परियोजना वर्ष 2019-20 तक पूरी होने की संभावना है। यह परियोजना झारखंड के गढ़वा, मध्य प्रदेश के सिंगरौली और उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिलों को कवर करेगी।

रमना-सिंगरौली खंड पूर्व मध्य रेलवे के धनबाद प्रभाग में पड़ता है। मौजूदा समय में इस खंड का यातायात उपयोग 105 फीसदी है, जिससे रेलगाड़ियों का परिचालन बाधित होता है और इसके साथ ही राजस्व का नुकसान भी होता है। इस खंड पर अपेक्षित यातायात प्रवाह सुनिश्चित करने और इस खंड की क्षमता बढ़ाने के लिए एकल लाइन वाले इस खंड का दोहरीकरण परिचालन की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है। इस परियोजना से नॉर्दर्न कोलफील्ड्स के अधिकार क्षेत्र में आने वाली यात्री एवं माल ढुलाई के साथ-साथ अनपरा और शक्तिनगर के आस-पास अवस्थित अनेक विद्युत संयंत्रों एवं संबंधित लघु उद्योगों जैसे कि अनपरा सुपर थर्मल पावर प्लांट, रिहंद सुपर थर्मल पावर प्लांट, रेणुसागर हाइड्रो पावर प्लांट, सिंगरौली सुपर थर्मल पावर प्लांट और विंध्याचल सुपर थर्मल पावर प्लांट की जरूरतें भी पूरी होंगी।

4) अनूपपुर और कटनी के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण

मध्य प्रदेश में अनूपपुर और कटनी के बीच 165 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन के निर्माण को भी 1595.76 करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई है। यह परियोजना 12वीं एवं 13वीं योजनावधि के दौरान सवा पांच वर्षों में पूरी होने की संभावना है।

यह परियोजना मध्य प्रदेश के अनूपपुर, शहडोल, उमरिया एवं कटनी जिलों को कवर करेगी।

हाल के महीनों में कोयले एवं अयस्क के खनन में भारी वृद्धि देखने को मिली है तथा इन संसाधनों के दोहन की दिशा में आने वाले वर्षों में और आगे बढ़ने के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर अब तक अमल नहीं हो पाया है। तेजी से हुए औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप परियोजना लाइन के आसपास अनेक औद्योगिक टाउनशिप भी विकसित हो गई है। इन बदलावों से इस खंड पर अतिरिक्त कोचों के लिए भारी मांग की जा रही है। माल ढुलाई में इस अपेक्षित वृद्धि के परिणामस्वरूप क्षमता उपयोग बढ़कर 175 फीसदी तक के स्तर पर पहुंच जाएगा। इसके अलावा आईबी वैली, कोरबा क्षेत्र, पूर्वी कॉरिडोर और गेवरा रोड-पेंड्रा रोड परियोजना से पर्याप्त अतिरिक्त कोयला यातायात को इस रूट के जरिए संबंधित गंतव्यों तक पहुंचाया जाएगा। यात्री एवं माल ढुलाई में हो रही वृद्धि को पूरा करने के लिए अनूपपुर और कटनी के बीच तीसरी लाइन को तिहरा करना अत्यंत आवश्यक है।

5) कटनी-सिंगरौली रेल लाइन का दोहरीकरण

261 किलोमीटर लंबी कटनी-सिंगरौली रेल लाइन के दोहरीकरण को 2084.90 करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दी गई है। यह परियोजना सवा पांच वर्षों में पूरी होगी। यह परियोजना मध्य प्रदेश में कटनी, शहडोल, सिद्धि और सिंगरौली जिलों को कवर करेगी।

कटनी-सिंगरौली रेल लाइन एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं व्यस्त खंड है, जो नॉर्दर्न कोलफील्ड्स से कोयले की ढुलाई पश्चिमी एवं उत्तरी ताप विद्युत संयंत्रों की ओर करती है। यह खंड कटनी में इलाहाबाद-मुंबई रूट को प्रतिच्छेद (इंटरसेक्ट) करता है। कटनी-सिंगरौली खंड के दोहरीकरण के प्रावधान से अतिरिक्त मेल/एक्सप्रेस और यात्री रेलगाड़ियों के शुभारंभ के लिए आवश्यक लाइन क्षमता सुलभ होगी, जिससे इस क्षेत्र के लोगों की जरूरतें पूरी होंगी और इसके साथ ही खदानों से कोयले की ढुलाई भी हो सकेगी। इससे इस क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

6) अतिरिक्त पुल का निर्माण और रामपुर डुमरा-ताल-राजेन्द्रपुल की दोहरीकरण परियोजना

बिहार में अतिरिक्त पुल के निर्माण और रामपुर डुमरा-ताल-राजेन्द्रपुल खंड की दोहरीकरण परियोजना को भी आज सीसीईए ने 1700.24 करोड़ रुपये की लागत के साथ मंजूरी दे दी।

यह परियोजना वर्ष 2019-20 तक पूरी होने की संभावना है। यह परियोजना बिहार के बेगूसराय और पटना जिलों में अवस्थित है।

हाथीदा में मौजूदा रेल-सह-सड़क पुल पर एकल लाइन वाला ट्रैक है और दोहरीकरण संभव नहीं है। इस खंड का क्षमता उपयोग मौजूदा समय में 123.5 फीसदी है। वर्तमान में यही एकमात्र रेल पुल है जो उत्तरी एवं दक्षिणी बिहार को एक-दूसरे से जोड़ता है। मौजूदा एकल लाइन की वजह से यात्री एवं माल ढुलाई बाधित होती है।

एकल लाइन वाले इस खंड पर परिचालन को दुरुस्त करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि एक अतिरिक्त पुल और इस खंड के दोहरीकरण का काम शुरू किया जाए। यह सुविधा हासिल हो जाने से इस खंड पर रेलगाड़ियों के परिचालन को बरकरार रखने के साथ-साथ और ज्यादा यात्री ट्रेनों/मालगाड़ियों को चलाने के लिए भी पर्याप्त गुंजाइश निकल आएगी। इससे लाइन क्षमता में भी काफी वृद्धि होगी। इसके अलावा, इससे किऊल-बरौनी और मोकामा-बरौनी खंड पर रेलगाड़ियों के परिचालन समय को न्यूनतम रखने में भी मदद मिलेगी। इतना ही नहीं, इससे इस खंड पर परिचालन की मौजूदा बाधाओं को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

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