रांची: प्रदेश के कई जिलों में इन दिनों फर्जी पत्रकार बनने और बनाने का गोरख धंधा तेजी से बढ़ता जा रहा है .सड़कों पर दिखने वाली हर चौथी गाड़ी में से एक गाड़ी में जरूर प्रेस लोगो दिखता नजर आ जाएगा, कई शहरों में अब तो पुलिस ने ऐसे फर्जी पत्रकारों के गैंग सहित उनकी बिना कागजात वाली गाड़िया भी सीज करनी शुरू कर उनके फर्जी आईडी प्रेस कार्ड के आधार पर मुकदमा भी लिखना शुरू कर दिया है. सरायकेला जिला में भी पुलिस ने कई ऐसे वाहन पकड़े हैं. प्रेस लिखकर कई अपराधी और नक्सली भी पुलिस से बचने का प्रयास करते हैं.फर्जी लोग अपनी गाड़ियों में बड़ा बड़ा प्रेस का मोनोग्राम तो लगाते ही है साथ ही फर्जी आईडी कार्ड भी बनवाकर अधिकारियो व लोगो को रौब में लेने का प्रयास भी करते है, कुछ संस्थाए तो ऐसी है जो 1000 रूपये से लेकर 5000 हजार रूपये जमा करवाकर अपनी संस्थान का कार्ड भी बना देती है और बेरोजगार युवकों को गुमराह कर उनसे धन उगाही करवाती है लेकिन पकडे जाने पर वो संस्थाए भी भाग खड़ी होती हैं. लगातार बढ़ती फर्जी पत्रकारों की संख्यासे न सिर्फ छोटे कर्मचारी से लेकर अधिकारी परेशान है बल्कि खुद समाज सम्मानित पत्रकार भी अपमानित महसूस नजर आते है. कुछ फर्जी पत्रकार तो अपनी गाड़ियों के आगे पीछे से लेकर वीआईपी विस्टिंग कार्ड भी छपवा रखे है जो लोग पुलिस की चेकिंग के दौरान उनको प्रेस (मीडिया ) का धौस भी दिखाते है गाड़ी रोकने पर पुलिस कर्मी से बत्तमीजी पर भी उतारू हो जाते है इनमे से तो बहुत से ऐसे पत्रकार है जो पेशे से तो भूमाफिया और अपराधी है जिन पर न जाने कितने अपराधिक मुक़दमे भी दर्ज है लेकिन अपनी खंचाड़ा गाड़ी से लेकर वीआईपी गाड़ी पर बड़ा बड़ा प्रेस मीडिया छपवा कर मीडिया को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते ! लेकिन अब ऐसे पत्रकारों को चिन्हित कर पुलिस विभाग के साथ साथ सम्मानित पत्रकार संघ अपमानित करेगा जो पत्रकारिता के चौथे स्तम्भ को बदनाम करेगा और ये कार्यवाही कई जिलों में शुरू की जायेगी. पत्रकारिता के नाम पर अपराधी किस्म के लोग पुलिस से बचने के बजाय अब जाएंगे जेल. इस कार्यवाही से फर्जी पत्रकार होंगे बेनकाब और अपराधी भी जेल जायेंगे.झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने पत्रकारों, उप संपादक(डेस्क), संपादक के इलावा अन्य किसी को भी वाहन पर प्रेस लिखने की अनुमति नहीँ देने की मांग करते हुये फर्जी पत्रकारों पर कार्यवाई के लिये डीजीपी झारखंड से आह्वान किया है.
