जिन्दगी बचाने का जज्बा रोशनी बन जाता है : एनडीआरएफ

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अंधेरा कितना भी घना हो, जिन्दगी बचाने का जज्बा रोशनी बन जाता है – इन चन्द पंक्तियों को वर्तमान बिहार बाढ़ आपदा में एनडीआरएफ के बचावकर्मी चरितार्थ कर रहे हैं। बिहटा (पटना) में स्थित 9वीं बटालियन एनडीआरएफ के कमान्डेंट विजय सिन्हा ने बताया कि विगत गुरुवार/शुक्रवार के देर रात दरभंगा जिले में तैनात एनडीआरएफ टीम को हनुमान नगर प्रखंडतर्गत बाढ़ से घिरे पंचोभ गाँव में मुसीबत में फँसी एक गर्भवती महिला को सहायता के लिए बुलाया गया। परिवार के लोग किसी अनहोनी के डर से भयाक्रान्त थे। गाँव के चारों तरफ पानी ही पानी। ऐसे में एनडीआरएफ की एक 09 सदस्यीय रेस्क्यू टीम जिला प्रशासन के समन्वय से अपने कर्तव्यनिष्ठा का निर्वहन करते हुए बिना समय गँवाये रेस्पांस किया और उस विकट अँधेरी रात में लगभग 10 किलोमीटर बोट चलाकर पीड़िता के गाँव पहुँची। फिर गर्भवती महिला काजल मिश्रा (24 वर्ष) को उनके परिजनों के साथ बाढ़ के पानी से घिरे पंचोभ गाँव से सुरक्षित निकालकर देर रात लगभग 0100 बजे हनुमान नगर (दरभंगा) प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तक पहुँचाने में मदद किया। अस्पताल पहुँचने के बाद गर्भवती महिला और उनके परिजनों ने चैन का सांस लिया।

कमान्डेंट विजय सिन्हा ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के माँग पर पटना जिले में तैनात एक टीम को सारण जिले के अमनौर प्रखण्ड में तैनात किया गया है। अब सारण जिले के पानापुर, तरैया और अमनौर प्रखण्डों में एनडीआरएफ की कुल 04 टीमें बाढ़ राहत व बचाव कार्य में जुटी हुई है। शुक्रवार को सारण जिले में गंडक नदी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित बाढ़ इलाके में एनडीआरएफ की टीमें रेस्क्यू ऑपेरशन चलाकर 600 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया इसमें बच्चे, बीमार, और गर्भवती महिलाएं शामिल है।

कमान्डेंट विजय सिन्हा ने बताया कि अब तक बिहार राज्य के विभिन्न जिलों में प्रशासन के सहयोग से रेस्क्यू ऑपेरशन चलाकर एनडीआरएफ के कार्मिकों ने 8,600 से अधिक बाढ़ विभीषिका में फँसे लोगों को रेस्क्यू बोटों द्वारा निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया है।

कमान्डेंट विजय सिन्हा ने बाढ़ आपदा की चुनौतियों से जूझ रहे लोगों को सलाह दिया कि आपदा में घबड़ाएं नहीं बल्कि अपने सुझबुझ और धैर्य का परिचय दें। जल्दबाजी में अपने परिवार व बच्चों के साथ किसी प्रकार का जान का जोखिम ना उठाएं। अफवाहों पर भी ध्यान ना दें। मदद के लिए प्रशासन अथवा इलाके में तैनात एनडीआरएफ या अन्य रेस्पांस टीमों से सम्पर्क करें और उन्हें बुलायें। एनडीआरएफ के कार्मिक लोगों की सहायता के लिए सतत तत्पर और तैयार हैं।

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